सिल्वर(II) फ्लोराइड

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सिल्वर(II) फ्लोराइड (Silver(II) fluoride) एक अकार्बनिक रासायनिक यौगिक है जिसका रासायनिक सूत्र AgF2 है। इसमें सिल्वर की औपचारिक ऑक्सीकरण अवस्था +2 और फ्लोराइड की −1 अवस्था होती है। यह सिल्वर के अपेक्षाकृत असामान्य उच्च-ऑक्सीकरण-अवस्था वाले यौगिकों में से एक है।

सिल्वर(II) फ्लोराइड एक शक्तिशाली फ्लोरीनीकरण तथा ऑक्सीकरण अभिकर्मक है। इसका उपयोग मुख्यतः कार्बनिक यौगिकों के फ्लोरीनीकरण तथा विभिन्न अकार्बनिक रासायनिक अभिक्रियाओं में किया जाता है। यह जल के साथ अत्यंत तीव्रता से अभिक्रिया करता है और इसलिए सामान्य जलीय विलयनों में स्थिर नहीं रहता।

संरचना

सिल्वर(II) फ्लोराइड का रासायनिक सूत्र AgF2 है। इसमें प्रत्येक सिल्वर केंद्र के साथ दो फ्लोराइड आयन संबंधित होते हैं। स्रोत के अनुसार इसकी आणविक ज्यामिति रैखिक तथा सिल्वर का समन्वय वातावरण टेट्रागोनली-विकृत अष्टफलकीय (tetragonally elongated octahedral) होता है।

इसका क्रिस्टल तंत्र ऑर्थोरोम्बिक क्रिस्टल तंत्र है।

ऑक्सीकरण अवस्था

AgF2 में प्रत्येक फ्लोराइड आयन की औपचारिक ऑक्सीकरण अवस्था −1 होती है। दो फ्लोराइड आयनों का कुल आवेश −2 होने के कारण सिल्वर की औपचारिक ऑक्सीकरण अवस्था +2 होती है:

Ag2+ + 2F− → AgF2

सिल्वर के +2 ऑक्सीकरण अवस्था वाले यौगिक अपेक्षाकृत दुर्लभ हैं। यही कारण है कि सिल्वर(II) फ्लोराइड सिल्वर के सामान्य +1 अवस्था वाले यौगिकों, जैसे सिल्वर(I) फ्लोराइड (AgF), से विशेष रूप से अलग है।

भौतिक गुण

स्वरूप

शुद्ध सिल्वर(II) फ्लोराइड सफेद से धूसर रंग के क्रिस्टलीय चूर्ण के रूप में पाया जाता है। अशुद्धियों की उपस्थिति में इसका रंग गहरा होकर भूरा या लगभग काला दिखाई दे सकता है।

यह आर्द्रताग्राही (hygroscopic) पदार्थ है और वायुमंडलीय नमी के संपर्क में आने पर अभिक्रिया कर सकता है।

मोलर द्रव्यमान और घनत्व

सिल्वर(II) फ्लोराइड का मोलर द्रव्यमान लगभग 145.865 g/mol तथा घनत्व लगभग 4.58 g/cm3 है।

गलनांक और क्वथनांक

इसका गलनांक लगभग 690 °C है। लगभग 700 °C पर यह उबलने के बजाय अपघटित हो सकता है।

जल के साथ अभिक्रियाशीलता

सिल्वर(II) फ्लोराइड जल में सामान्य अर्थ में स्थिर रूप से घुलने के बजाय जल के साथ तीव्र अभिक्रिया करता है। इस कारण इसका उपयोग और भंडारण नमी से मुक्त परिस्थितियों में किया जाता है।

निर्माण

सिल्वर(II) फ्लोराइड को सिल्वर(I) फ्लोराइड के फ्लोरीनीकरण द्वारा तैयार किया जा सकता है। उच्च तापमान पर तत्वीय फ्लोरीन AgF के साथ अभिक्रिया करके AgF2 बना सकता है:

2AgF + F2 → 2AgF2

सिल्वर-आधारित अन्य प्रारंभिक पदार्थों को भी नियंत्रित परिस्थितियों में फ्लोरीन के साथ अभिक्रिया कराकर सिल्वर(II) फ्लोराइड तैयार किया जा सकता है।

यह प्रक्रिया अत्यंत प्रतिक्रियाशील फ्लोरीन के कारण विशेष उपकरण और नियंत्रित परिस्थितियों की मांग करती है।

रासायनिक गुण

सिल्वर(II) फ्लोराइड एक शक्तिशाली ऑक्सीकारक और फ्लोरीनीकरण अभिकर्मक है। अभिक्रियाओं में Ag(II) को Ag(I) में अपचयित किया जा सकता है और साथ ही संबंधित पदार्थ का ऑक्सीकरण या फ्लोरीनीकरण हो सकता है।

एक सामान्य उदाहरण में कार्बनिक C–H बंध को C–F बंध में परिवर्तित किया जा सकता है:

CZ3H + 2AgF2 → CZ3F + HF + 2AgF

यहाँ Z कार्बन से जुड़ा कोई परमाणु या समूह दर्शाता है।

कुछ हैलोजनीकृत कार्बनिक यौगिकों में भी फ्लोरीनीकरण संभव है:

CZ3X + 2AgF2 → CZ3F + X2 + 2AgF

जहाँ X किसी हैलोजन को दर्शाता है।

असंतृप्त यौगिकों के फ्लोरीनीकरण का एक उदाहरण:

Z2C=CZ2 + 2AgF2 → Z2CFCFZ2 + 2AgF

फ्लोरीनीकरण में उपयोग

सिल्वर(II) फ्लोराइड का सबसे महत्वपूर्ण उपयोग फ्लोरीनीकरण रसायन में है। यह कार्बनिक यौगिकों में फ्लोरीन परमाणु शामिल करने के लिए एक प्रभावी अभिकर्मक हो सकता है।

उदाहरण के लिए, बेंजीन का फ्लोरीनीकरण करके फ्लोरोबेंजीन बनाया जा सकता है:

C6H6 + 2AgF2 → C6H5F + 2AgF + HF

इस प्रकार AgF2 कार्बनिक फ्लोरीन यौगिकों की तैयारी में उपयोगी है।

इसी प्रकार के फ्लोरीनीकरण के लिए CoF3, MnF3 और CeF4 जैसे उच्च-ऑक्सीकरण-अवस्था वाले धातु फ्लोराइडों का भी उपयोग किया जा सकता है।

अकार्बनिक अभिक्रियाएँ

सिल्वर(II) फ्लोराइड कुछ अकार्बनिक पदार्थों के साथ भी तीव्र अभिक्रिया करता है।

जीनॉन का फ्लोरीनीकरण

निर्जल हाइड्रोजन फ्लोराइड के वातावरण में AgF2 जीनॉन को जीनॉन डाइफ्लोराइड में परिवर्तित कर सकता है:

2AgF2 + Xe → 2AgF + XeF2

यह अभिक्रिया AgF2 की प्रबल फ्लोरीनीकरण क्षमता को दर्शाती है।

कार्बन मोनोऑक्साइड के साथ अभिक्रिया

सिल्वर(II) फ्लोराइड कार्बन मोनोऑक्साइड को कार्बोनिल फ्लोराइड में परिवर्तित कर सकता है:

2AgF2 + CO → 2AgF + COF2

जल के साथ अभिक्रिया

जल के साथ AgF2 की अभिक्रिया में सिल्वर यौगिक, हाइड्रोजन फ्लोराइड और ऑक्सीजन बन सकते हैं:

4AgF2 + 4H2O → 2Ag2O + 8HF + O2

यह अभिक्रिया इसकी जल के प्रति अत्यधिक अभिक्रियाशीलता को दर्शाती है।

चुंबकीय गुण

स्रोत में सिल्वर(II) फ्लोराइड को सामान्य परिस्थितियों में पैरामैग्नेटिक बताया गया है। बहुत कम तापमान पर इसके चुंबकीय गुणों में परिवर्तन देखा जा सकता है।

सुरक्षा

सिल्वर(II) फ्लोराइड एक अत्यंत प्रतिक्रियाशील और शक्तिशाली ऑक्सीकारक है। यह जल के साथ तीव्र अभिक्रिया करता है और अभिक्रिया के दौरान ऊष्मा तथा संक्षारक हाइड्रोजन फ्लोराइड उत्पन्न हो सकता है।

यह कुछ कार्बनिक पदार्थों तथा अपचायक पदार्थों के साथ खतरनाक या तीव्र अभिक्रियाएँ कर सकता है। विशेष रूप से हाइड्रोजन पेरॉक्साइड, कुछ ज्वलनशील पदार्थों और अन्य आसानी से ऑक्सीकृत होने वाले पदार्थों के संपर्क से बचना चाहिए।

इसका प्रयोग केवल उपयुक्त प्रयोगशाला सुरक्षा व्यवस्था और नियंत्रित परिस्थितियों में किया जाना चाहिए। इसे नमी से दूर, संगत और निष्क्रिय भंडारण व्यवस्था में रखना आवश्यक है।

संबंधित यौगिक

यह भी देखें

संदर्भ

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