सिल्वर(I) फ्लोराइड

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सिल्वर(I) फ्लोराइड (Silver(I) fluoride) एक अकार्बनिक यौगिक है जिसका रासायनिक सूत्र AgF है। यह सिल्वर और फ्लोरीन से बना एक आयनिक यौगिक है, जिसमें सिल्वर की ऑक्सीकरण अवस्था +1 होती है। यह सिल्वर के प्रमुख फ्लोराइड यौगिकों में से एक है। अन्य संबंधित यौगिकों में सिल्वर सबफ्लोराइड (Ag2F) और सिल्वर(II) फ्लोराइड (AgF2) शामिल हैं।

सिल्वर(I) फ्लोराइड का उपयोग मुख्यतः कार्बनिक संश्लेषण तथा फ्लोरीनीकरण रसायन में किया जाता है। यह विशेष रूप से कार्बनिक अणुओं में फ्लोरीन परमाणु या फ्लोरीन-युक्त समूहों को शामिल करने वाली अभिक्रियाओं में उपयोगी है।

संरचना और संघटन

सिल्वर(I) फ्लोराइड एक आयनिक यौगिक है। इसमें Ag+ और F− आयन होते हैं:

Ag+ + F− → AgF

सिल्वर की +1 ऑक्सीकरण अवस्था और फ्लोराइड की −1 ऑक्सीकरण अवस्था के कारण यौगिक का कुल विद्युत आवेश शून्य होता है।

सिल्वर(I) फ्लोराइड की क्रिस्टल संरचना घनाकार (cubic) होती है।

भौतिक गुण

स्वरूप

सिल्वर(I) फ्लोराइड सामान्यतः पीले-भूरे रंग के ठोस के रूप में पाया जाता है। यह सामान्य परिस्थितियों में ठोस अवस्था में रहता है।

मोलर द्रव्यमान और घनत्व

AgF का मोलर द्रव्यमान लगभग 126.87 g/mol है। 15 °C पर इसका घनत्व लगभग 5.852 g/cm3 है।

गलनांक और क्वथनांक

सिल्वर(I) फ्लोराइड का गलनांक लगभग 435 °C है, जबकि इसका क्वथनांक लगभग 1159 °C बताया जाता है।

विलेयता

सिल्वर(I) फ्लोराइड अन्य कई सिल्वर हैलाइडों की तुलना में जल में अत्यधिक विलेय है। उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार, इसकी जल में विलेयता तापमान बढ़ने के साथ बढ़ती है।

लगभग 0 °C पर 100 mL जल में 85.78 g, 10 °C पर 119.8 g, 25 °C पर 179.1 g और 50 °C पर 213.4 g AgF घुल सकता है।

यह हाइड्रोजन फ्लोराइड में भी विलेय है तथा मेथनॉल में इसकी सीमित विलेयता होती है।

निर्माण

सिल्वर(I) फ्लोराइड को विभिन्न रासायनिक विधियों द्वारा तैयार किया जा सकता है।

सिल्वर कार्बोनेट और हाइड्रोजन फ्लोराइड

सिल्वर कार्बोनेट की हाइड्रोजन फ्लोराइड के साथ अभिक्रिया से सिल्वर(I) फ्लोराइड बनाया जा सकता है:

Ag2CO3 + 2HF → 2AgF + H2O + CO2

यह विधि उच्च तापमान पर नियंत्रित परिस्थितियों में की जा सकती है।

सिल्वर टेट्राफ्लुओरोबोरेट का अपघटन

प्रयोगशाला में AgF को सिल्वर टेट्राफ्लुओरोबोरेट के ऊष्मीय अपघटन से भी तैयार किया जा सकता है:

AgBF4 → AgF + BF3

सिल्वर(I) ऑक्साइड और हाइड्रोजन फ्लोराइड

एक अन्य विधि में सिल्वर(I) ऑक्साइड को हाइड्रोजन फ्लोराइड में अभिक्रिया कराई जाती है:

Ag2O + 2HF → 2AgF + H2O

इसके बाद उपयुक्त परिस्थितियों में AgF को विलयन से अलग किया जा सकता है।

रासायनिक गुण

सिल्वर(I) फ्लोराइड एक आयनिक फ्लोराइड है और इसकी उच्च जल-विलेयता इसे अन्य कम-विलेय सिल्वर हैलाइडों से अलग करती है।

जल में घुलने पर यह आयनिक रूप से विघटित हो सकता है:

AgF(aq) → Ag+(aq) + F−(aq)

Ag+ आयन अन्य आयनों के साथ अवक्षेपण तथा समिश्र-निर्माण जैसी अभिक्रियाओं में भाग ले सकता है।

उपयोग

कार्बनिक संश्लेषण

सिल्वर(I) फ्लोराइड का महत्वपूर्ण उपयोग कार्बनिक रसायन में होता है। इसका उपयोग कुछ कार्बनिक यौगिकों में फ्लोरीन या फ्लोरीन-युक्त समूहों को शामिल करने वाली अभिक्रियाओं में किया जाता है।

विशेष रूप से, यह कुछ पर्फ्लुओरोऐल्कीन के साथ अभिक्रिया करके पर्फ्लुओरोऐल्किल सिल्वर यौगिकों के निर्माण में उपयोग किया जा सकता है। ऐसे मध्यवर्ती आगे अन्य कार्बनिक फ्लोरीन यौगिकों के संश्लेषण में उपयोगी हो सकते हैं।

डीसिलिलीकरण

AgF का उपयोग कुछ कार्बनिक संश्लेषणों में डीसिलिलीकरण अभिकर्मक के रूप में किया जाता है। यह सिलिकॉन-आधारित सुरक्षात्मक समूहों को हटाने वाली अभिक्रियाओं में उपयोगी हो सकता है।

डीसल्फरीकरण और फ्लोरीनीकरण

सिल्वर(I) फ्लोराइड का उपयोग कुछ थायोयूरिया-आधारित यौगिकों से संबंधित अभिक्रियाओं में डीसल्फरीकरण-फ्लोरीनीकरण अभिकर्मक के रूप में किया जा सकता है।

अकार्बनिक संश्लेषण

AgF का उपयोग विभिन्न अन्य सिल्वर तथा फ्लोरीन-युक्त अकार्बनिक यौगिकों की तैयारी में अभिकर्मक के रूप में भी किया जाता है।

अन्य सिल्वर फ्लोराइडों से संबंध

सिल्वर और फ्लोरीन के बीच कई प्रकार के यौगिक ज्ञात हैं:

  • सिल्वर(I) फ्लोराइड — AgF
  • सिल्वर सबफ्लोराइड — Ag2F
  • सिल्वर(II) फ्लोराइड — AgF2

इन यौगिकों में सिल्वर की औपचारिक ऑक्सीकरण अवस्था और संरचना अलग-अलग होती है।

सुरक्षा

सिल्वर(I) फ्लोराइड को संक्षारक पदार्थ के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। यह त्वचा तथा आँखों को गंभीर क्षति पहुँचा सकता है। इसके साथ काम करते समय सुरक्षात्मक दस्ताने, सुरक्षा चश्मे और उपयुक्त प्रयोगशाला सुरक्षा उपायों का प्रयोग किया जाना चाहिए।

विशेष रूप से हाइड्रोजन फ्लोराइड के साथ इसकी तैयारी में अत्यधिक सावधानी आवश्यक है, क्योंकि हाइड्रोजन फ्लोराइड स्वयं अत्यंत संक्षारक और विषैला पदार्थ है।

संबंधित यौगिक

संदर्भ

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