सिल्वर सबफ्लोराइड

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सिल्वर सबफ्लोराइड (Silver subfluoride) एक अकार्बनिक यौगिक है जिसका रासायनिक सूत्र Ag2F है। इसे डाइ-सिल्वर फ्लोराइड भी कहा जाता है। यह एक असामान्य सिल्वर फ्लोराइड है, क्योंकि इसके सूत्र से यह संकेत मिलता है कि सिल्वर की औसत ऑक्सीकरण अवस्था +1/2 है। इसे औपचारिक रूप से सिल्वर(0,I) फ्लोराइड भी कहा जाता है।

सिल्वर सबफ्लोराइड की संरचना सामान्य सिल्वर(I) फ्लोराइड, AgF, से भिन्न है। यह जल के साथ अत्यंत तीव्र अभिक्रिया करता है और इसके संपर्क में आने पर सिल्वर का अवक्षेप बन सकता है।

निर्माण

सिल्वर सबफ्लोराइड को सिल्वर और सिल्वर(I) फ्लोराइड की अभिक्रिया द्वारा तैयार किया जा सकता है:

Ag + AgF → Ag2F

इस अभिक्रिया में सिल्वर धातु और सिल्वर(I) फ्लोराइड मिलकर Ag2F का निर्माण करते हैं। साहित्य में इस यौगिक की तैयारी को डाइ-सिल्वर फ्लोराइड के निर्माण के रूप में भी वर्णित किया गया है।

भौतिक गुण

सिल्वर सबफ्लोराइड कांस्य रंग के छोटे क्रिस्टलों के रूप में पाया जाता है, जिनमें हरे रंग की आभा दिखाई दे सकती है। इसका घनत्व लगभग 8.6 g/cm3 है।

इसका गलनांक लगभग 90 °C बताया जाता है, हालांकि इस तापमान पर यौगिक अपघटित हो सकता है। इसलिए इसे सामान्य अर्थ में स्पष्ट गलनांक के बजाय अपघटन तापमान के रूप में देखना अधिक उपयुक्त है।

यह विद्युत का अच्छा चालक है, जो इसकी असामान्य संरचना और धात्विक सिल्वर-सिल्वर अंतःक्रियाओं से संबंधित है।

रासायनिक गुण

सिल्वर सबफ्लोराइड जल के प्रति अत्यधिक अभिक्रियाशील है। जल के संपर्क में आने पर इसका लगभग तत्काल जलअपघटन होता है और सिल्वर का अवक्षेप बन सकता है।

Ag2F की यह अभिक्रियाशीलता इसे सामान्य जल-विलेय सिल्वर लवणों से अलग बनाती है। इसके कारण यौगिक को नमी से दूर तथा नियंत्रित परिस्थितियों में संभालना आवश्यक होता है।

क्रिस्टल संरचना

Ag2F एक ऐसी क्रिस्टल संरचना अपनाता है जो कैडमियम आयोडाइड (CdI2) की संरचना के विपरीत मानी जाती है। इस संरचना में सिल्वर के केंद्र और फ्लोराइड आयन एक नियमित स्तरित व्यवस्था बनाते हैं।

न्यूट्रॉन पाउडर विवर्तन अध्ययनों के अनुसार, इसकी संरचना में सिल्वर की औसत स्थिति को पारंपरिक एकल ऑक्सीकरण अवस्था द्वारा सरलता से वर्णित नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि Ag2F को सिल्वर के मिश्रित-ऑक्सीकरण-अवस्था वाले यौगिक का असामान्य उदाहरण माना जाता है।

Ag2F में निकटतम सिल्वर-सिल्वर दूरी लगभग 299.6 pm बताई गई है, जो धात्विक सिल्वर में देखी जाने वाली दूरी से अधिक है।

ऑक्सीकरण अवस्था

Ag2F में फ्लोराइड की औपचारिक ऑक्सीकरण अवस्था −1 होती है। पूरे यौगिक को विद्युत रूप से उदासीन रखने के लिए दोनों सिल्वर परमाणुओं की औसत औपचारिक ऑक्सीकरण अवस्था +1/2 होती है।

इसे सरल औपचारिक रूप में इस प्रकार लिखा जा सकता है:

2Ag+1/2 + F−1 → Ag2F

हालाँकि, यह औसत ऑक्सीकरण अवस्था यौगिक में प्रत्येक सिल्वर परमाणु की वास्तविक इलेक्ट्रॉनिक अवस्था का पूर्ण वर्णन नहीं करती। इसी असामान्य इलेक्ट्रॉनिक संरचना के कारण Ag2F संक्रमण-धातु रसायन में रुचि का विषय है।

संबंधित यौगिक

सुरक्षा

सिल्वर सबफ्लोराइड अत्यधिक अभिक्रियाशील पदार्थ है और जल के साथ तीव्र अभिक्रिया करता है। इसलिए इसे नमी से दूर रखना आवश्यक है। इसके प्रयोग और भंडारण के दौरान उचित रासायनिक सुरक्षा उपाय अपनाए जाने चाहिए।

संदर्भ

  • Lee Poyer, Maurice Fielder, Hugh Harrison, Burl E. Bryant, “Disilver Fluoride: (Silver ‘Subfluoride’)”, Inorganic Syntheses, Volume 5, 1957, pp. 92–94.
  • A. Williams, “Neutron powder diffraction study of silver subfluoride”, Journal of Physics: Condensed Matter, Volume 1, Issue 15, 1989, pp. 2569–2574.
  • Egon Wiberg, Arnold Frederick Holleman, Inorganic Chemistry, Elsevier, 2001.

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