लकड़बग्घा (Hyenas)

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लकड़बग्घा (अंग्रेज़ी: Hyena) हायनिडे (Hyaenidae) कुल से संबंधित एक मांसाहारी स्तनधारी जीव है। देखने में कुत्तों जैसे लगने के बावजूद, विकासवादी दृष्टिकोण से ये फ़ेलिफ़ोर्मिया (Feliformia) उपगण के अंतर्गत मार्जार (बिल्ली) और सिवेट कुल के अधिक निकट होते हैं। ये मुख्य रूप से एशिया और अफ़्रीका महाद्वीपों के जंगलों, सवाना और घास के मैदानों में पाए जाते हैं।

वर्तमान में लकड़बग्घा परिवार में चार जीवित प्रजातियाँ मौजूद हैं:

  1. धारीदार लकड़बग्घा (Striped Hyena - Hyaena hyaena): यह भारतीय उपमहाद्वीप (भारत), मध्य पूर्व, काकेशस और उत्तरी व पूर्वी अफ़्रीका में पाया जाता है।
  2. चित्तीदार लकड़बग्घा (Spotted Hyena - Crocuta crocuta): यह उप-सहारा अफ़्रीका में पाया जाने वाला सबसे बड़ा और सामाजिक लकड़बग्घा है।
  3. भूरा लकड़बग्घा (Brown Hyena - Parahyaena brunnea / Hyaena brunnea): यह दक्षिणी अफ़्रीका के शुष्क क्षेत्रों और कालाहारी रेगिस्तान तक सीमित है।
  4. आर्डवुल्फ (Aardwolf - Proteles cristata): यह पूर्वी और दक्षिणी अफ़्रीका में पाया जाने वाला एक छोटा, कीटभक्षी सदस्य है।

शारीरिक विशेषताएँ एवं अनुकूलन

लकड़बग्घा अपनी अद्वितीय शारीरिक संरचना और मजबूत जबड़ों के लिए जाना जाता है:

  • शक्तिशाली जबड़े और दांत: अपने शरीर के आकार के अनुपात में लकड़बग्घे के जबड़े स्तनधारियों में सबसे शक्तिशाली जबड़ों में गिने जाते हैं। इनके विशेष दाढ़ के दांत (Premolars) भारी हड्डियों को चबाने और तोड़ने के लिए अनुकूलित होते हैं।
  • अत्यधिक अम्लीय पाचन तंत्र: इनके पेट में अत्यंत सांद्र हाइड्रोक्लोरिक एसिड और शक्तिशाली पाचक रस स्रावित होते हैं, जो मांस, त्वचा, दांत, सींग और यहां तक कि मोटी हड्डियों को भी पूरी तरह पचा लेते हैं। (बाल और खुर पचते नहीं हैं, जिन्हें ये उल्टी के रूप में बाहर निकाल देते हैं)।
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता: इनके पेट के अम्लीय स्राव हानिकारक जीवाणुओं (Bacteria) और संक्रामक रोगाणुओं को नष्ट कर देते हैं, जिससे ये सड़े-गले शवों को खाकर भी बीमार नहीं पड़ते और प्रकृति में उत्कृष्ट सफाईकर्मी (Scavenger) का काम करते हैं।

व्यवहार एवं पारिस्थितिकी

  • शिकार और अपमार्जन: चित्तीदार लकड़बग्घा एक कुशल और आक्रामक शिकारी है जो बड़े झुंडों (Clans) में मिलकर जेब्रा, वाइल्डबीस्ट और हिरणों का शिकार करता है। इसके विपरीत, धारीदार और भूरे लकड़बग्घे मुख्य रूप से अकेले रहते हैं और सड़े-गले मांस व शवों (Scavenging) पर निर्भर रहते हैं।
  • आर्डवुल्फ की विशिष्टता: आर्डवुल्फ अन्य तीन प्रजातियों से बिल्कुल अलग होता है। इसके जबड़े और दांत कमजोर होते हैं और यह बड़े जानवरों का शिकार करने के बजाय मुख्य रूप से दीमक (termites) और अन्य कीड़ों को चाटकर खाता है।

विकास एवं उत्पत्ति (Evolution)

लकड़बग्घों की उत्पत्ति लगभग 2.2 करोड़ वर्ष पूर्व (22 मिलियन वर्ष पहले) मायोसीन युग के दौरान यूरेशिया के जंगलों में हुई थी। प्रारंभिक पूर्वज मुख्य रूप से वृक्षीय (पेड़ों पर चढ़ने वाले) और आधुनिक अफ़्रीकी सिवेट (Viverrids) जैसे दिखते थे। सबसे प्रारंभिक ज्ञात पूर्वजों में से एक प्लियोविवेरॉप्स (Plioviverrops) था, जो 20-22 मिलियन वर्ष पूर्व यूरेशिया में रहने वाला एक फुर्तीला और छोटा कीटभक्षी जीव था। बाद के युगों में बड़े शाकाहारी जीवों के अवशेषों को खाने के अनुकूलन के रूप में आधुनिक भारी जबड़ों वाले लकड़बग्घे विकसित हुए।

संदर्भ


बाहरी कड़ियाँ

  • विकिमीडिया कॉमन्स पर लकड़बग्घा (Hyaenidae) से सम्बन्धित मीडिया उपलब्ध है।
  • विकिस्पीशीज़ पर हायनिडे से सम्बन्धित प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध है।

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