परमाणु सिद्धांत (Atomic Theory)
Template:Infobox scientific concept
परमाणु सिद्धांत (Atomic Theory) भौतिकी एवं रसायन विज्ञान का एक केंद्रीय वैज्ञानिक सिद्धांत है, जिसके अनुसार समस्त पदार्थ सूक्ष्म एवं मूलभूत इकाइयों से निर्मित हैं, जिन्हें परमाणु (Atom) कहा जाता है। प्राचीन काल में इसे एक दार्शनिक अवधारणा माना जाता था, किंतु 19वीं शताब्दी के प्रारंभ में यह एक सशक्त वैज्ञानिक सिद्धांत के रूप में स्थापित हुआ।[1]
'एटम' (Atom) शब्द की उत्पत्ति प्राचीन यूनानी शब्द *एटॉमस* (Atomos) से हुई है, जिसका अर्थ है "अविभाज्य" (जिसे आगे तोड़ा न जा सके)।[2] 19वीं और 20वीं शताब्दी के अनुसंधानों (विशेषकर विद्युत चुम्बकत्व एवं रेडियोधर्मिता) ने सिद्ध किया कि परमाणु अविभाज्य नहीं हैं, बल्कि वे इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन तथा न्यूट्रॉन जैसे अव-परमाण्विक कणों से मिलकर बने हैं।
दार्शनिक पृष्ठभूमि
पदार्थ की सूक्ष्म अविभाज्य संरचना का विचार प्राचीन भारत (महर्षि कणाद का वैशेषिक दर्शन) तथा प्राचीन ग्रीस में स्वतंत्र रूप से विकसित हुआ। 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व में यूनानी दार्शनिक ल्यूसिपस (Leucippus) तथा उनके शिष्य डेमोक्रिटस (Democritus) ने प्रतिपादित किया कि पदार्थ को अंततः ऐसे सूक्ष्म कणों में विभाजित किया जा सकता है जिन्हें आगे तोड़ना संभव नहीं है।[3]
17वीं शताब्दी में रॉबर्ट बॉयल और सर आइजैक न्यूटन जैसे वैज्ञानिकों ने परमाणुवाद का समर्थन किया, जिसने 19वीं सदी के वैज्ञानिक मॉडल की नींव रखी।
डाल्टन का परमाणु सिद्धांत
1808 में ब्रिटिश रसायनविद् जॉन डाल्टन ने द्रव्यमान संरक्षण के नियम (Law of Conservation of Mass) तथा निश्चित अनुपात के नियम (Law of Definite Proportions) के आधार पर प्रथम वैज्ञानिक परमाणु सिद्धांत प्रस्तुत किया:[4][5]
- प्रत्येक तत्व अत्यंत सूक्ष्म, अविभाज्य कणों से बना है जिन्हें परमाणु कहते हैं।
- किसी एक ही तत्व के सभी परमाणु द्रव्यमान एवं रासायनिक गुणों में पूर्णतः समान होते हैं।
- भिन्न-भिन्न तत्वों के परमाणु परस्पर सरल पूर्णांक अनुपातों में संयोग करके रासायनिक यौगिक बनाते हैं (गुणिज अनुपात का नियम - Law of Multiple Proportions)।
- रासायनिक अभिक्रियाओं में परमाणु न तो बनाए जा सकते हैं और न ही नष्ट किए जा सकते हैं; केवल उनका पुनर्संयोजन होता है।
अवोगाद्रो की परिकल्पना (1811)
अमीडियो अवगाद्रो ने स्पष्ट किया कि समान ताप और दाब पर सभी गैसों के समान आयतन में कणों (अणुओं) की संख्या समान होती है।[6] उन्होंने परमाणु (Atom) और अणु (Molecule) के मध्य स्पष्ट वैज्ञानिक अंतर स्थापित किया।
ब्राउनी गति (Brownian Motion)
1827 में रॉबर्ट ब्राउन द्वारा देखी गई परागकणों की अनियमित गति की सफल व्याख्या 1905 में अल्बर्ट आइंस्टीन ने आण्विक गतिक सिद्धांत के आधार पर की,[7] जिसकी प्रायोगिक पुष्टि 1908 में जीन पेरिन ने की। इसने परमाणुओं के वास्तविक भौतिक अस्तित्व पर अंतिम मुहर लगाई।
अव-परमाण्विक कणों एवं मॉडलों का विकास
थॉमसन का मॉडल एवं इलेक्ट्रॉन की खोज (1897)
सर जे जे थॉमसन ने कैथोड किरण नलिका (Cathode Ray Tube) प्रयोगों के माध्यम से ऋणावेशित कण इलेक्ट्रॉन की खोज की तथा इसके विशिष्ट आवेश () का मान ज्ञात किया।[8] उन्होंने 'प्लम पुडिंग मॉडल' प्रस्तावित किया, जिसमें धनावेशित गोले के भीतर इलेक्ट्रॉन तरबूज के बीज की तरह धँसे हुए माने गए।
रदरफोर्ड का नाभिकीय मॉडल (1911)
अर्नेस्ट रदरफोर्ड, हैंस गाइगर और अर्नेस्ट मार्सडेन के स्वर्ण-पत्र अल्फा कण प्रकीर्णन प्रयोग (Gold Foil Experiment) में अधिकांश अल्फा कण सीधे निकल गए, किंतु कुछ कण अत्यधिक कोणों (यहाँ तक कि ) पर विक्षेपित हुए।[9] इसके आधार पर रदरफोर्ड ने निष्कर्ष दिया:
- परमाणु का संपूर्ण धनावेश और लगभग समस्त द्रव्यमान उसके केंद्र में अत्यंत सूक्ष्म स्थान में संकेंद्रित रहता है, जिसे नाभिक (Nucleus) कहा जाता है।
- इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर विस्तृत खाली स्थान में चक्कर लगाते हैं।
- 1917–1919 में रदरफोर्ड ने नाभिक के मूलभूत धनावेशित कण के रूप में प्रोटॉन की पहचान की।
बोर का क्वांटम मॉडल (1913)
रदरफोर्ड के मॉडल की अस्थिरता को दूर करने हेतु नील्स बोर ने प्लांक के क्वांटम सिद्धांत को लागू किया:[10]
- इलेक्ट्रॉन केवल कुछ निश्चित, गैर-विकिरणी स्थिर कक्षाओं (Discrete Stationary Orbits) में ही चक्कर लगाते हैं, जहाँ उनका कोणीय संवेग होता है।
- इलेक्ट्रॉन ऊर्जा का अवशोषण या उत्सर्जन केवल एक ऊर्जा स्तर से दूसरे स्तर में संक्रमण (Quantum Jump) के दौरान ही करते हैं:
न्यूट्रॉन की खोज (1932)
1932 में जेम्स चैडविक ने बेरीलियम पर अल्फा कणों की बमबारी करके विद्युत-उदासीन उप-परमाण्विक कण न्यूट्रॉन की खोज की, जिसका द्रव्यमान लगभग प्रोटॉन के बराबर था।[11] इसके लिए उन्हें 1935 में नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।
आधुनिक क्वांटम यांत्रिक मॉडल
1920 के दशक में आधुनिक क्वांटम भौतिकी ने निश्चित वृत्तीय कक्षाओं की अवधारणा को समाप्त कर दिया:
- डी ब्रोग्ली की द्रव्य-तरंगें (1924): गतिशील इलेक्ट्रॉनों में कण और तरंग दोनों की प्रकृति होती है ()।
- हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता सिद्धांत (1927): किसी इलेक्ट्रॉन की स्थिति () और संवेग () का एक साथ परिशुद्ध मापन संभव नहीं है ()।[12]
- श्रोडिंगर तरंग समीकरण (1926) एवं कक्षक (Orbital): इरविन श्रोडिंगर ने इलेक्ट्रॉन की तरंग प्रकृति हेतु त्रि-विमीय तरंग समीकरण प्रस्तुत किया।[13] मैक्स बॉर्न के अनुसार तरंग फलन का वर्ग () नाभिक के चारों ओर किसी स्थान पर इलेक्ट्रॉन के पाए जाने की प्रायिकता (Probability Density) को दर्शाता है।
आधुनिक परमाणु मॉडल में इलेक्ट्रॉन निश्चित पथों पर न घूमकर नाभिक के चारों ओर एक **इलेक्ट्रॉन प्रायिकता मेघ** (Electron Cloud / कक्षक) के रूप में वितरित रहते हैं।
संदर्भ
- ↑ प्रसाद, कोडवतीगंटी रोहिणी (2012). अणुओं की शक्ति (तेलुगु: అణువుల శక్తి), हैदराबाद बुक ट्रस्ट, पृ. 13.
- ↑ Berryman, Sylvia (2008). "Ancient Atomism". Stanford Encyclopedia of Philosophy.
- ↑ Pullman, Bernard (1998). The Atom in the History of Human Thought, Oxford University Press, pp. 31–33. ISBN 978-0-19-515040-7.
- ↑ Proust, Joseph Louis (1799). "Researches on Copper", Ann. chim. 32, pp. 26–54.
- ↑ Dalton, John (1803). "On the Absorption of Gases by Water and Other Liquids", Memoirs of the Literary and Philosophical Society of Manchester.
- ↑ Avogadro, Amedeo (1811). "Essay on a Manner of Determining the Relative Masses of the Elementary Molecules of Bodies", Journal de Physique, 73, pp. 58–76.
- ↑ Einstein, A. (1905). "Über die von der molekularkinetischen Theorie der Wärme geforderte Bewegung von in ruhenden Flüssigkeiten suspendierten Teilchen". Annalen der Physik, 322(8), pp. 549–560. doi:10.1002/andp.19053220806.
- ↑ Thomson, J.J. (1897). "Cathode rays". Philosophical Magazine, 44(269), p. 293. doi:10.1080/14786449708621070.
- ↑ Geiger, H. (1910). "The Scattering of the α-Particles by Matter". Proceedings of the Royal Society A, 83, pp. 492–504.
- ↑ Bohr, Niels (1913). "On the constitution of atoms and molecules". Philosophical Magazine, 26(153), pp. 476–502. doi:10.1080/14786441308634993.
- ↑ Chadwick, James (1932). "Possible Existence of a Neutron". Nature, 129(3252), p. 312. doi:10.1038/129312a0.
- ↑ Heisenberg, W. (1927). "Über den anschaulichen Inhalt der quantentheoretischen Kinematik und Mechanik". Zeitschrift für Physik, 43(3–4), pp. 172–198. doi:10.1007/BF01397280.
- ↑ Schrödinger, Erwin (1926). "Quantisation as an Eigenvalue Problem". Annalen der Physik, 81(18), pp. 109–139. doi:10.1002/andp.19263861802.
