क्विनिडाइन (Quinidine)

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क्विनिडाइन (Quinidine) एक एल्कलॉइड है। क्विनिडाइन, कुनैन (Quinine) का एक त्रिविम समावयवी (stereoisomer) है। समावयवी (आइसोमर) का अर्थ है कि इनका रासायनिक सूत्र तो समान होता है, लेकिन उनमें तत्वों की संरचनात्मक व्यवस्था भिन्न होती है। क्विनिडाइन मुख्य रूप से दक्षिण अमेरिका के सिनकोना (Cinchona) पेड़ की छाल से प्राप्त होता है।

क्विनिडाइन को ज्ञात शुरुआती एंटीअरिदमिक (antiarrhythmic) दवाओं में से एक माना जाता है, जो क्लास 1a एंटीअरिदमिक दवा और मलेरिया-रोधी औषधि के रूप में काम करती है। यह मुख्य रूप से रोगियों में विशिष्ट अतालता (arrhythmia - अनियमित हृदय गति) और मलेरिया को नियंत्रित करने तथा इसके इलाज के लिए उपयोग की जाने वाली दवा है।[1] [2] वर्तमान में KCNT1 (पोटेशियम सोडियम-सक्रिय चैनल सबफ़ैमिली T सदस्य 1) से संबंधित मिर्गी (epileptic) विकारों के प्रबंधन में क्विनिडाइन की संभावित भूमिका पर शोध चल रहा है, और इसे इसके लिए FDA की मंजूरी मिल चुकी है।[3][4] यह एंटीअरिदमिक दवाओं के वर्ग से संबंधित है, जो हृदय को असामान्य गतिविधियों के प्रति अधिक प्रतिरोधी बनाकर काम करता है।[5]

सिनकोना का पेड़

Template:मुख्य लेख क्विनिडाइन सिनकोना पेड़ और इसकी कई प्रजातियों से निकाला जाता है। ये पेड़ मुख्य रूप से दक्षिण अमेरिका के एंडीज (Andes) क्षेत्र में मैडर (Madder) परिवार में पाए जाते हैं। इन पेड़ों की छाल में कुनैन और क्विनिडाइन होता है। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान मलेरिया के इलाज के लिए सिनकोना के पेड़ की छाल से बनी कुनैन की गोलियों ने एक प्रभावी औषधि के रूप में काम किया था।

इतिहास

क्विनिडाइन के उपयोग का इतिहास बहुत पुराना है। इसके औषधीय गुणों की खोज का श्रेय सबसे पहले पेरूवासियों को जाता है। 1853 में लुई पाश्चर (Louis Pasteur) ने बुखार के इलाज के लिए पहली बार क्विनिडाइन को अलग किया था। 1630 में स्पेनिश मिशनरियों द्वारा इसकी छाल पेरू से यूरोप लाई गई थी, जहां मलेरिया के इलाज में इसका महत्व पहचाना गया।

अतालता (Arrhythmia) के लिए क्विनिडाइन का उपयोग 1912 तक दुनिया को अज्ञात था, जब तक कि प्रोफेसर कार्ल एफ. वेंकेबैक (Karel F. Wenckebach) ने इसे नहीं पहचाना।[6] 1918 में, बर्लिन के डब्ल्यू. फ्रे (W. Frey) ने चार सिनकोना एल्कलॉइड्स का अध्ययन किया और पाया कि एट्रियल फाइब्रिलेशन (atrial fibrillation) के उपचार के लिए क्विनिडाइन सबसे प्रभावी था। 1920 में, थॉमस लुईस ने अपनी परिकल्पना (सर्कस मूवमेंट) के माध्यम से साबित किया कि क्विनिडाइन सामान्य हृदय गति को बहाल करता है।[7]

मलेरिया के इलाज के लिए सिनकोना की छाल का उपयोग सदियों से किया जाता रहा है, लेकिन एट्रियल फाइब्रिलेशन में इसकी प्रभावकारिता की सूचना केवल 1749 में जीन-बैप्टिस्ट डी सेनाक द्वारा दी गई थी। एक सदी बाद 1853 में पाश्चर द्वारा क्विनिडाइन को अलग किया गया।[8] 1914 में वेंकेबैक ने बताया कि कुनैन एट्रियल फाइब्रिलेशन को दबा सकता है, और बाद में (1923) उन्होंने उल्लेख किया कि यह जानकारी उन्होंने अपने एक मरीज से प्राप्त की थी। कुनैन की एंटीअरिदमिक क्रिया के लिए जिम्मेदार सक्रिय यौगिक के रूप में क्विनिडाइन की पहचान का श्रेय फ्रे (1918) को दिया जाता है। इसके बाद यह दवा बहुत तेजी से लोकप्रिय हुई।[9]

ऐतिहासिक रूप से, क्विनिडाइन हृदय की अतालता के उपचार में इस्तेमाल की जाने वाली पहली दवा थी। 20वीं सदी की शुरुआत के अध्ययनों ने इसे सिनकोना पौधे से निकाले गए सबसे शक्तिशाली एंटीमलेरियल कुनैन के डायस्टेरियोमर के रूप में पहचाना।[10]

संरचना

क्विनिडाइन एक सिनकोना एल्कलॉइड है जिसमें क्विनोलिन रिंग की 6-स्थिति पर मेथोक्सी (methoxy) समूह द्वारा प्रतिस्थापित हाइड्रोजन के साथ सिनकोनिन होता है। इसका रासायनिक सूत्र Template:Chem2 है।[11] यह कुनैन (Quinine) का D-आइसोमर (D-isomer) है।

  • IUPAC नाम: (S)-[(2R,4S,5R)-5-ethenyl-1-azabicyclo[2.2.2]octan-2-yl]-(6-methoxyquinolin-4-yl)methanol.[12]

भौतिक गुण

गुण मान
रासायनिक सूत्र Template:Chem2
आणविक भार 324.4 ग्राम/मोल
भौतिक रूप क्रिस्टल या सफेद पाउडर[13]
गलनांक (Melting Point) 174-175 °C (नमी हटने के बाद)[14]
क्वथनांक (Boiling Point) 462.75°C (अनुमानित)[15]
घनत्व (Density) 1.1294[15]
अपवर्तनांक (Refractive index) 1.5700 (अनुमानित)[15]
जल में घुलनशीलता अघुलनशील (20°C पर 0.05 ग्राम/लीटर)[15]

क्विनिडाइन का चयापचय (Metabolism)

क्विनिडाइन मुख्य रूप से यकृत (लीवर) में साइटोक्रोम P450 एंजाइम, विशेष रूप से CYP3A4 द्वारा चयापचय (metabolized) किया जाता है। इसका मुख्य मेटाबोलाइट 3-हाइड्रोक्सी-क्विनिडाइन है, जिसकी वितरण मात्रा क्विनिडाइन से अधिक होती है, और इसका उन्मूलन आधा जीवन (half-life) लगभग 12 घंटे होता है। यह चयापचय उत्पाद एंटीअरिदमिक क्रिया में काफी हद तक भूमिका निभाता है।[16]

यकृत में हाइड्रॉक्सिलेशन के माध्यम से क्विनिडाइन का चयापचय 3-हाइड्रोक्सीक्विनिडाइन और 2-क्विनिडिनोन में होता है। लगभग 10-50% क्विनिडाइन 24 घंटों के भीतर मूत्र के माध्यम से बिना किसी बदलाव के उत्सर्जित हो जाता है।[17] स्वस्थ वयस्कों में इसका आधा जीवन (half-life) 6-8 घंटे और बच्चों में 3-4 घंटे होता है। मलेरिया के रोगियों में इसका आधा जीवन औसतन 12.8 घंटे तक बढ़ सकता है, और यकृत रोग वाले रोगियों में भी इसका निष्कासन समय बढ़ जाता है।

औषधीय उपयोग

  • क्विनिडाइन का उपयोग एट्रियल फाइब्रिलेशन, फ्लटर, वेंट्रिकुलर अतालता और अनियमित हृदय गति के उपचार तथा रोकथाम के लिए किया जाता है। आमतौर पर इसका उपयोग तब किया जाता है जब अन्य दवाएं काम नहीं करती हैं।
  • क्विनिडाइन सल्फेट का उपयोग मलेरिया के इलाज के लिए भी किया जाता है।[18]
  • यह दवा गोलियों (सामान्य और धीमी गति से घुलने वाली) और इंजेक्शन के रूप में उपलब्ध है।

दुष्प्रभाव (Side Effects)

क्विनिडाइन का उपयोग केवल डॉक्टर की सलाह और निर्धारित मात्रा में ही करना चाहिए। कुछ लोगों में एलर्जी या प्रतिकूल प्रभाव हो सकते हैं। निम्नलिखित लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें:[19]

  • तेज हृदय गति, सीने में धड़कन महसूस होना, सांस फूलना या अचानक चक्कर आना।
  • उल्टी, दस्त।
  • कानों में बजना (Tinnitus) या बहरापन।
  • आंखें लाल होना, दृष्टि संबंधी समस्याएं, प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता।
  • घरघराहट, सीने में जकड़न, सांस लेने में कठिनाई।
  • आसानी से चोट लगना या असामान्य रक्तस्राव।
  • त्वचा का पीला पड़ना (पीलिया), ऊपरी दाहिने पेट में दर्द, गहरे रंग का मूत्र।
  • बुखार, ठंड लगना, गले में खराश।
  • त्वचा पर लाल चकत्ते, खुजली, छाले, या सूर्य के प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता।
  • मांसपेशियों या जोड़ों में दर्द, मुंह सूखना।

अन्य दवाओं के साथ इंटरैक्शन

क्विनिडाइन को निम्नलिखित दवाओं के साथ नहीं लिया जाना चाहिए:[20] एबारेलिक्स (Abarelix), एमिलोराइड, एंटीफंगल दवाएं (जैसे इट्राकोनाजोल या केटोकोनाजोल), क्विनोलोन एंटीबायोटिक्स, सिसाप्राइड, हेलोपरिडोल, एंटीमलेरियल दवाएं (क्लोरोक्वीन, हेलोफैंट्रिन, मेफ्लोक्वीन), ट्राइसाइक्लिक एंटीडिप्रेसेंट्स, मेथैडोन, पेंटामिडाइन, और अन्य हृदय ताल नियंत्रक दवाएं।

खुराक (Dosage)

  • वयस्कों के लिए, क्विनिडाइन ग्लूकोनेट (Quinidine gluconate) की खुराक सीमा 648 से 2592 मिलीग्राम/दिन तक हो सकती है।[21]
  • वयस्कों के लिए, क्विनिडाइन सल्फेट (Quinidine sulfate) की खुराक सीमा 400 से 4000 मिलीग्राम/दिन तक होती है।
  • क्विनिडाइन ग्लूकोनेट इंजेक्शन की खुराक 400 से 2400 मिलीग्राम/दिन होती है।[22]

इन्हें भी देखें

संदर्भ

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श्रेणी:रासायनिक यौगिक श्रेणी:कार्बनिक यौगिक श्रेणी:पादप रसायन श्रेणी:औषधियाँ श्रेणी:SciWiki Chemistry

  1. ↑ Ashish Jain; JITENDRA SISODIA.Author Information and Affiliations. Last Update: August 2, 2023.
  2. ↑ Template:Citeweb
  3. ↑ Xu D, Chen S, Yang J, Wang X, Fang Z, Li M. Precision therapy with quinidine of KCNT1-related epileptic disorders: A systematic review. Br J Clin Pharmacol. 2022 Dec;88(12):5096-5112
  4. ↑ Template:Citeweb
  5. ↑ Template:Citeweb
  6. ↑ Quinidine,M. Tsai-Turton,in Encyclopedia of Toxicology (Third Edition),2014
  7. ↑ Template:Citeweb
  8. ↑ Quinidine,Mauro Cataldi, in xPharm: The Comprehensive Pharmacology Reference,2010
  9. ↑ Askey (1946) Parkinson and Campbell (1929) Sokolow (1951) Viko et al (1923).
  10. ↑ Template:Citeweb
  11. ↑ {{citeweb|url=https://www.ebi.ac.uk/chebi/searchId.do?chebiId=CHEBI:127150#:~:text=CHEBI%3A28593%20%2D%20quinidine&text=A%20cinchona%20alkaloid%20consisting%20of,quinoline%20ring%20substituted%20by%20methoxy. |title= CHEBI:28593 - quinidine|publisher= ebi.ac.uk|accessdate=2024-03-22}
  12. ↑ Computed by Lexichem TK 2.7.0 (PubChem release 2021.10.14)
  13. ↑ Template:Citeweb
  14. ↑ Template:Citeweb
  15. ↑ 15.0 15.1 15.2 15.3 Template:Citeweb
  16. ↑ Template:Citeweb
  17. ↑ McEvoy, G.K. (ed.). American Hospital Formulary Service - Drug Information 2003. Bethesda, MD: American Society of Health-System Pharmacists, Inc. 2003 (Plus Supplements)., p. 1571
  18. ↑ Template:Citeweb
  19. ↑ Template:Citeweb
  20. ↑ Template:Citeweb
  21. ↑ Template:Citeweb
  22. ↑ Pharmacy Author: Annette (Gbemudu) Ogbru, PharmD, MBA Medical and Pharmacy Editor: Jay W. Marks, MD