आर्थ्रोपोडा (Arthropoda)
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आर्थ्रोपोडा (लैटिन: Arthropoda) जंतु जगत का सबसे बड़ा संघ (Phylum) है। इस संघ में जंतुओं की लगभग 80% प्रजातियाँ शामिल हैं। ये त्रिस्तरीय (triploblastic), द्विपार्श्व सममित (bilaterally symmetrical), और खंडीकृत (segmented) प्रोटोस्टोम जीव हैं। ये सार्वभौमिक रूप से भूमि, मीठे पानी, समुद्रों और हवा में पाए जाते हैं। आर्थ्रोपोडा जीवों की मुख्य विशेषता इनके जुड़े हुए पैर (Jointed appendages) हैं। इनका बाह्य कंकाल (Exoskeleton) प्रोटीन और काइटिन (Chitin) की परतों से बने स्क्लेराइट्स (sclerites) से निर्मित होता है। झींगा, कीट, कनखजूरे, सहस्रपाद, बिच्छू, और मकड़ियाँ इसी संघ के अंतर्गत आते हैं।
सामान्य लक्षण
- शारीरिक संगठन: इनका शरीर खंडीकृत होता है और मुख्य रूप से सिर (Head), वक्ष (Thorax) और उदर (Abdomen) में विभाजित रहता है (या कुछ में सिर और धड़ में)। इनमें सिर स्पष्ट रूप से विकसित (Cephalization) होता है, जहाँ संवेदी और तंत्रिका तंत्र केंद्रित होते हैं।
- उपांग: इनमें संधियुक्त या जुड़े हुए उपांग (Jointed appendages) पाए जाते हैं, जिनके कारण इन्हें आर्थ्रोपोडा कहा जाता है।
- बाह्य कंकाल: शरीर के बाहर काइटिन (Chitin) से बना एक कठोर कंकाल होता है। वृद्धि करने के लिए ये जीव समय-समय पर अपने पुराने कंकाल को त्याग देते हैं, जिसे निर्मोचन (Moulting या Ecdysis) कहा जाता है। यह कंकाल शरीर से जल की हानि को रोकता है।
- पेशियाँ: जंतु जगत में पहली बार इनमें रेखित पेशियाँ (Striated muscles) पाई जाती हैं।
- परिसंचरण तंत्र: इनमें खुला परिसंचरण तंत्र (Open circulatory system) होता है। रक्त (हीमोलिम्फ) कोटरों (Sinuses) से होकर बहता है। इनका हृदय पृष्ठ भाग (Dorsal side) में स्थित होता है। क्रस्टेशिया और अरैक्निडा में तांबा-युक्त श्वसन वर्णक हीमोसायनिन (Hemocyanin) पाया जाता है।
- श्वसन तंत्र: आर्थ्रोपोडा के विभिन्न समूहों में श्वसन गिल्स (क्लोम), श्वासनली (Trachea), बुक लंग्स (Book lungs), या बुक गिल्स (Book gills) के द्वारा होता है।
- उत्सर्जन तंत्र: उत्सर्जन के लिए ग्रीन ग्रंथि (Green glands), मैल्पीघियन नलिकाएं (Malpighian tubules), या कोक्सल ग्रंथि (Coxal glands) पाई जाती हैं।
- तंत्रिका तंत्र: इनके तंत्रिका तंत्र में एक तंत्रिका वलय (Nerve ring) और दोहरा अधर तंत्रिका रज्जु (Double ventral nerve cord) शामिल होता है।
- संवेदी अंग: इनमें संयुक्त नेत्र (Compound eyes), सरल नेत्र (Simple eyes), शृंगिका (Antennae) और संतुलन पुटी (Statocysts) जैसे उन्नत संवेदी अंग पाए जाते हैं।
- प्रजनन और विकास: ये सामान्यतः एकलिंगी (Dioecious) जीव होते हैं और इनमें आंतरिक निषेचन (Internal fertilization) होता है। इनका विकास मुख्य रूप से अप्रत्यक्ष होता है, जिसमें जीवन चक्र के दौरान एक या अधिक लार्वा अवस्थाएं होती हैं (कायांतरण या Metamorphosis)।
वर्गीकरण
आर्थ्रोपोडा को प्रमुख उपसंघों और वर्गों में इस प्रकार विभाजित किया जाता है:
- उपसंघ I: ट्राइलोबाइटा (Trilobita)
- ये प्राचीन आर्थ्रोपोड थे जो अब विलुप्त हो चुके हैं।
- ये सभी समुद्री जीव थे।
- इनके शरीर के चारों ओर काइटिन का एक कठोर आवरण होता था।
- शरीर तीन स्पष्ट भागों में विभाजित था: सिर, वक्ष और पाइजिडियम (Pygidium)।
- सिर में शृंगिकाएं, एक जोड़ी आंखें और चार जोड़ी उपांग होते थे। उदाहरण: ट्राइलोबाइट (Trilobite)।
- उपसंघ II: केलीसेरेटा (Chelicerata)
- उपसंघ III: मैंडिबुलेटा (Mandibulata)
