अमेज़ोनिया-1 (Amazonia-1)

From LTRC
आकालिफ़ा (Acalypha) - -
Scientific Classification
Kingdom: Plantae

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आकालिफ़ा (वैज्ञानिक नाम: Acalypha indica L.) एउफोर्बिएसिए कुल का एक पौधा है। इसके व्यापार कार्य का नाम 'आकालिफ़ा' इसके वैज्ञानिक नाम पर ही आधारित है। यह पौधा अपने औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है।

अन्य भाषाओं में नाम

विभिन्न भारतीय भाषाओं में इस पौधे को अलग-अलग नामों से पहचाना जाता है:

  • हिंदी में इसे कुप्पी कहा जाता है।
  • संस्कृत में इसे हरितमंजरी के नाम से जाना जाता है।
  • कन्नड़ भाषा में इसका नाम कुप्पीगिडा है।
  • गुजराती में इसे वेंछिकांटो, चररजो-झाड़ और रुंछाडो-दादरो कहा जाता है।
  • तमिल में इसे कुप्पेमणि कहते हैं।
  • तेलुगु भाषा में भी इसे कुप्पेमणि कहा जाता है।
  • बंगला में इसे मुक्तझूरि और मुक्तबर्सी के नाम से पुकारते हैं।
  • मराठी में इसे खोकली कहा जाता है।
  • मलयालम में इसे कुप्पामणि कहते हैं।

वर्णन

  • यह लगभग 75 सेमी ऊंचा पौधा होता है।
  • इसके पत्ते 3-8 सेमी लंबे, अंडाकार अथवा चतुष्कोण-अंडाकार से होते हैं।
  • पत्तों में प्राय: तीन शिराएं होती हैं, और उनके किनारे दंतुर होते हैं।
  • इस पौधे के पत्तों के डंठल पत्तों से भी लंबे होते हैं।
  • फूल छोटे-छोटे होते हैं तथा पत्तों के कक्ष में, स्पाइक जैसे, सीधे गुच्छों में लगते हैं।
  • मादा पुष्प के नीचे एक तिकोना-सा सहपत्र होता है।
  • नरपुष्प अत्यंत छोटे होते हैं, तथा स्पाइक के ऊपरी भाग में लगते हैं।
  • पौधे के फल रोयेंदार होते हैं तथा सहपत्रों में ढके रहते हैं।

प्राप्ति-स्थान

खोकली का पौधा भारत के सभी मैदानी भागों में पाया जाता है। यह प्राय: उद्यानों व खेतों में तथा सड़कों व मकानों के आसपास उग आता है।

औषधीय गुण और उपयोग

  • खोकली के पौधों पर जिस समय फूल आते हैं, उस समय उन्हें समूचा उखाड़कर सुखा लेते हैं और औषधि में प्रयोग करते हैं।
  • इस पौधे में ईपेकाक जैसे गुण बताते हैं।
  • यह (ब्रोंकाइटिस) श्वास नली की सूजन, श्वासरोग या दमा, निमोनिया तथा गठिया में उपयोगी है।
  • इसकी जड़ व पत्ते रेचक होते हैं।
  • पत्तों का रस वमनकारी होता है, अर्थात उसके सेवन से कै हो जाती है।
  • ताजे पत्तों को पीस कर फोड़ों पर भी लगाते हैं।