चमगादड़ (Bat)

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चमगादड़ (अंग्रेज़ी: Bat) एक स्तनधारी जीव है, जो मुख्य रूप से रात्रिचर (nocturnal) होता है।

चमगादड़

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चमगादड़ अंधेरे में रास्ता कैसे खोजते हैं?

यह एक सामान्य अनुभव है कि सूर्यास्त होते ही चमगादड़ अपने छिपने के स्थानों या पेड़ों से बाहर आ जाते हैं और बहुत तेज़ी से उड़ते हुए अचानक दिशा बदल लेते हैं, जैसे उन्हें कुछ याद आ गया हो।

ये उड़ने वाले कीड़ों का बड़ी संख्या में शिकार करते हैं। घने अंधेरे में भी ये बिना किसी रुकावट के आसानी से उड़ सकते हैं और उन कीड़ों को भी पकड़ कर खा सकते हैं जिन्हें हम अपनी आँखों से नहीं देख सकते।

चमगादड़ बहुत ही अद्भुत जीव हैं। अंधेरे में उड़ने की क्षमता ही इनकी एकमात्र विशेषता नहीं है! ये पक्षी नहीं हैं, बल्कि स्तनधारी (mammals) हैं। ये अंडे नहीं देते, बल्कि बच्चों को जन्म देते हैं। इनके दांत और कान होते हैं। स्तनधारियों में उड़ने में सक्षम एकमात्र जीव चमगादड़ ही है! जीवाश्मों (fossils) के अध्ययन से पता चलता है कि ये कम से कम 6 करोड़ वर्षों से पृथ्वी पर मौजूद हैं। वर्तमान में चमगादड़ों की लगभग 1200 से 1400 प्रजातियाँ पाई जाती हैं। ध्रुवीय क्षेत्रों को छोड़कर ये लगभग पूरी दुनिया में पाए जाते हैं। इनके पंखों का फैलाव छह इंच से लेकर छह फीट तक हो सकता है! इनमें से अधिकांश कीड़े खाते हैं। हालांकि, कुछ प्रजातियाँ पक्षियों को खाने वाली, मछलियाँ पकड़ने वाली और यहां तक कि खून पीने वाली (Vampire bats) भी होती हैं।

लंबे समय तक वैज्ञानिक यह नहीं समझ पा रहे थे कि चमगादड़ घने अंधेरे में भी पेड़ों, इमारतों या खंभों से टकराए बिना कैसे उड़ लेते हैं! इसका पता लगाने के लिए एक प्रयोग किया गया। एक बड़े कमरे में आड़े-तिरछे तार बांधे गए। फिर कुछ चमगादड़ों को पकड़कर उनकी आँखों पर पट्टी बांध दी गई और उन्हें कमरे में छोड़ दिया गया। तारों के साथ एक घंटी बांधी गई थी, ताकि यदि कोई चमगादड़ तार से टकराए तो घंटी बज उठे। आश्चर्यजनक रूप से, आँखों पर पट्टी होने के बावजूद चमगादड़ अपनी सामान्य गति से उड़े और एक भी तार से बिना टकराए आसानी से उनके बीच से निकल गए! इससे यह साबित हो गया कि चमगादड़ रास्ता खोजने के लिए अपनी आँखों का उपयोग नहीं करते हैं। लेकिन यह कैसे संभव था?

दूसरे प्रयोग में, चमगादड़ों की आँखों से पट्टी हटा दी गई और उनके कानों को बंद (प्लग लगा दिया गया) कर दिया गया। इस बार वे ठीक से नहीं उड़ सके। वे बार-बार तारों से ही नहीं, बल्कि दीवारों से भी टकराने लगे। तीसरे प्रयोग में, उनके मुंह को बंद करके छोड़ दिया गया। इस बार भी वे ठीक से नहीं उड़ पाए।

इससे यह स्पष्ट हो गया कि चमगादड़ अपना रास्ता कैसे खोजते हैं। उड़ते समय वे अपने मुंह (या नाक) से एक बहुत ही बारीक ध्वनि निकालते हैं। यह ध्वनि सामान्य ध्वनि तरंगों की तुलना में बहुत अधिक आवृत्ति (Frequency) वाली होती है (लगभग 45,000 से 50,000 हर्ट्ज़ प्रति सेकंड), इसलिए यह हमारे कानों को सुनाई नहीं देती (अल्ट्रासाउंड / Ultrasound)। जब ये उच्च आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगें किसी बाधा या वस्तु से टकराकर वापस लौटती हैं (Echo), तो चमगादड़ के कान उन्हें ग्रहण कर लेते हैं। इनके कान अत्यधिक संवेदनशील होते हैं। इन परावर्तित ध्वनि तरंगों को सुनकर चमगादड़ अपने सामने मौजूद बाधा की सटीक स्थिति का पता लगा लेते हैं।

वे यह भी जान लेते हैं कि वह वस्तु स्थिर है या गतिशील है, और यदि गतिशील है तो वह किस दिशा में और कितनी गति से आगे बढ़ रही है! इससे वे यह तय करते हैं कि वह वस्तु उनका शिकार है या कोई पेड़ की शाखा जिससे उन्हें बचना है, और उसी के अनुसार वे अपनी दिशा बदल लेते हैं। इस पूरी प्रक्रिया को प्रतिध्वनि निर्धारण (Echolocation) कहा जाता है।

इसका अर्थ यह नहीं है कि इनकी आँखें बिल्कुल बेकार होती हैं। जब वे किसी वस्तु के करीब पहुँचते हैं, तो वे अपनी आँखों का उपयोग यह देखने के लिए करते हैं कि वह उनका शिकार है या नहीं।

इसमें एक और दिलचस्प बात है। कुछ कीड़े इन उच्च आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगों को महसूस कर सकते हैं और तुरंत छिपने की कोशिश करते हैं। अर्थात्, उन्होंने इन तरंगों और खतरे के बीच के संबंध को समझ लिया है! यह इस सिद्धांत का एक उदाहरण है कि प्रकृति में परिस्थितियों के अनुसार ढलने वाले जीव ही जीवन के संघर्ष में जीवित रह पाते हैं।

मनुष्य ने चमगादड़ों से एक अद्भुत तकनीक सीखी है! जिस तरह चमगादड़ ध्वनि तरंगों का उपयोग करके सामने की वस्तुओं का पता लगाते हैं, उसी सिद्धांत पर वैज्ञानिकों ने "रडार" (Radar) का आविष्कार किया। इसका आविष्कार द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान किया गया था। रडार का उपयोग बहुत दूर से ही दुश्मन के विमानों का पता लगाने के लिए किया जाता है। इसमें उच्च आवृत्ति वाली रेडियो तरंगों (Radio waves) का उपयोग किया जाता है। जब ये तरंगें सामने आ रहे विमानों से टकराकर वापस लौटती हैं, तो यह पता चल जाता है कि विमान कितनी दूर है, किस दिशा में है और कितनी गति से उड़ रहा है। इससे उसे मार गिराने के लिए पहले से ही आवश्यक तैयारी की जा सकती है।

चमगादड़ उल्टे क्यों लटकते हैं?

पक्षी और कीड़े भी उड़ते हैं, लेकिन उनमें से कोई भी उल्टा नहीं लटकता। यह आवश्यकता केवल चमगादड़ों को ही क्यों पड़ी? अन्य उड़ने वाले पक्षी आवश्यकता पड़ने पर अपने पैरों से चल सकते हैं, लेकिन चमगादड़ बिल्कुल नहीं चल सकते। उनके पैरों में चलने की क्षमता नहीं होती है। इसलिए, यदि उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना है, तो उनके पास उड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। यदि उन्हें थोड़ी देर के लिए रुकना या आराम करना हो, तो उनके लिए सबसे आसान तरीका यही है कि वे अपने पंखों या पैरों के पंजों से किसी पेड़ की शाखा या दीवार की दरार को पकड़कर उल्टे लटक जाएं। उल्टे लटकने से उन्हें उड़ान भरने (take off) में आसानी होती है, क्योंकि वे गुरुत्वाकर्षण की मदद से स्वयं को नीचे गिराकर तुरंत उड़ सकते हैं।

चमगादड़ स्तनधारियों में उड़ने में सक्षम एकमात्र जीव है! यह बच्चों को जन्म देता है और उन्हें दूध पिलाता है। मादा चमगादड़ शिकार पर जाते समय अपने बच्चे को पेट से चिपका कर उड़ती है। उड़ने वाली गिलहरियाँ (Flying squirrels) और उड़ने वाले लेमूर (Flying lemurs) भी होते हैं, लेकिन वे वास्तव में उड़ नहीं सकते, वे केवल ऊंचाई से नीचे की ओर ग्लाइड (glide) करते हैं।

चमगादड़ के पंख पक्षियों के पंखों से बहुत अलग होते हैं। पक्षियों के पंखों में पंख (feathers) होते हैं, जबकि चमगादड़ के पंख उंगलियों के बीच तनी हुई छाते के कपड़े जैसी त्वचा (membrane) से बने होते हैं। इसकी उंगलियां छाते की तीलियों की तरह काम करती हैं। इनके पंखों में अंगूठा (thumb) अलग से बाहर निकला होता है, जिसमें एक नुकीला नाखून होता है जो किसी शाखा को पकड़ने के काम आता है। इनकी पकड़ इतनी मजबूत होती है कि नींद में भी ये गिरते नहीं हैं।

इनमें से अधिकांश चमगादड़ कीड़े खाते हैं। कुछ फल खाते हैं (जिन्हें फ्रूट बैट कहा जाता है), कुछ फूलों का पराग (nectar) चाटते हैं, और कुछ प्रजातियाँ सो रहे जानवरों का खून पीती हैं (Vampire bats)।

इन्हें भी देखें

संदर्भ


बाहरी कड़ियाँ

  • विकिमीडिया कॉमन्स पर चमगादड़ (Chiroptera) से सम्बन्धित मीडिया उपलब्ध है।
  • विकिस्पीशीज़ पर कायरॉप्टेरा से सम्बन्धित प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध है।

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