रूफस-बेलिड ईगल (Rufous-bellied Eagle)

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रूफस-बेलिड ईगल (Rufous-bellied eagle, लाल पेट वाला गरुड़), जिसका वैज्ञानिक नाम लोफोट्रियोर्किस कीनेरी (Lophotriorchis kienerii) है, एक्सीपिट्रिडे (Accipitridae) परिवार से संबंधित एक शिकारी पक्षी है। यह मुख्य रूप से उष्णकटिबंधीय एशिया के जंगली क्षेत्रों में पाया जाता है। सामान्य गरुड़ों की तुलना में इसका आकार छोटा होता है और इसके रंगों का पैटर्न बाज (Falcon) के समान होता है। पहले इस प्रजाति को हिरैतुस (Hieraaetus) और कभी-कभी एक्विला (Aquila) वंश में रखा गया था, लेकिन इसकी अनूठी विशेषताओं के कारण इसे एक अलग वंश (Genus) के रूप में मान्यता दी गई।

वर्गीकरण और नामकरण

कैद में एक रूफस-बेलिड ईगल (वयस्क पक्षी)।

हिमालय में पाए गए एक पक्षी के नमूने के आधार पर इस गरुड़ का वर्णन पहली बार एस्टर कीनेरी (Astur kienerii) के रूप में किया गया था। इसके बाद थॉमस सी. जेर्डन ने इसे लिम्नेटस वंश में, फिर लोफोट्रियोर्किस में और बाद में "हॉक-ईगल्स" कहे जाने वाले हिरैतुस वंश में रखा।[1] कुछ प्रजातियों पर किए गए आनुवंशिक (DNA) अध्ययनों के आधार पर, वैज्ञानिकों ने पाया कि 'कीनेरी' प्रजाति अन्य गरुड़ों से काफी भिन्न है, इसलिए इसे एक अलग वंश में रखने का निर्णय लिया गया।

इसके व्यापक आवास क्षेत्र में दो उपप्रजातियां पहचानी गई हैं:

  1. L. k. kienerii: भारत और श्रीलंका में पाई जाने वाली प्रजाति (उत्तरी क्षेत्र के पक्षी आकार में थोड़े बड़े होते हैं)।
  2. L. k. formosus: जिसका वर्णन 1924 में एर्विन स्ट्रेसमैन द्वारा किया गया था। यह म्यांमार से लेकर सुलावेसी तक पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया में फैली हुई है।[2]

इस पक्षी का वैज्ञानिक नाम 'कीनेरी' फ्रांसीसी प्रकृतिवादी 'लुई चार्ल्स कीनर' (1799-1881) के सम्मान में काउंट लुई अर्नेस्ट गुस्ताव डी स्पारे द्वारा रखा गया था।

शारीरिक विशेषताएँ

रूफस-बेलिड ईगल को उनके विशिष्ट रंग पैटर्न द्वारा आसानी से पहचाना जा सकता है। इनके सिर पर काले रंग का एक हुड (Hood) और छोटी कलगी (Crest) होती है। इनका गला और छाती का हिस्सा सफेद होता है, जबकि पेट और पंखों का भीतरी भाग गहरा लाल-भूरा (Chestnut) होता है, जो एक स्पष्ट विरोधाभास पैदा करता है। नर और मादा दिखने में लगभग एक जैसे होते हैं, हालांकि मादाएं आकार में थोड़ी बड़ी होती हैं और उनके चेहरे पर अधिक काला रंग होता है। ये पेड़ों पर बिल्कुल सीधे बैठते हैं। इनके पैर (Tarsus) पूरी तरह से पंखों से ढके होते हैं। युवा पक्षियों का पेट सफेद होता है और शरीर के किनारों पर काले निशान होते हैं।[3][4]

आवास और वितरण

उड़ान भरता हुआ रूफस-बेलिड ईगल।

रूफस-बेलिड ईगल दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के क्षेत्रों से लेकर सुलावेसी द्वीप तक फैले हुए हैं। यह प्रजाति मुख्य रूप से पहाड़ी क्षेत्रों के घने जंगलों में निवास करती है। भारत में, ये हिमालय की तुलना में पश्चिमी घाट (नेपाल से असम तक) में अधिक पाए जाते हैं। इसके अलावा, इन्हें पूर्वी घाट के कुछ हिस्सों (जैसे आंध्र प्रदेश और झारखंड) में भी देखा गया है।[5][6]

व्यवहार और पारिस्थितिकी

शारीरिक माप (मिमी में)
क्षेत्र लिंग लंबाई पूंछ टार्सस (पैर)
हिमालय[3] नर 490-505 210-230 150-160
मादा 535-560 236-250 165-175
श्रीलंका[3] नर 450-475 180-200 150-200
मादा ज्ञात नहीं 100-200 ज्ञात नहीं

ये गरुड़ आमतौर पर जंगल की छतरी (Canopy) के ऊपर ऊंचाई पर उड़ते हुए दिखाई देते हैं। ये आसमान में उड़ने वाले अन्य पक्षियों या पेड़ों और जमीन पर रहने वाले छोटे स्तनधारियों का तेजी से गोता (Dive) लगाकर शिकार करते हैं। ऐसा प्रमाण मिला है कि ये जंगली कबूतरों, जंगली मुर्गों और मोर का भी शिकार करते हैं।[7][8]

इनका प्रजनन काल सर्दियों में शुरू होता है, और वसंत ऋतु तक इनके बच्चे बड़े हो जाते हैं। उड़ते समय ये विभिन्न हवाई करतब दिखाते हैं और 'फविक, फविक...' या 'स्वीक!' जैसी तेज आवाजें निकालते हैं। ये जंगल में ऊंचे, पत्ती रहित पेड़ों पर सूखी टहनियों से एक बड़े मंच जैसा घोंसला बनाते हैं।[9] घोंसले के अंदर ये हरी पत्तियां बिछाते हैं। मादा केवल एक अंडा देती है। नर और मादा दोनों मिलकर अंडे को सेने, बच्चों को खाना खिलाने और घोंसले की रक्षा करने का काम करते हैं।[4]

इन्हें भी देखें

संदर्भ

  1. ↑ Blanford, W.T. (1895). "The Fauna of British India. Birds". Vol. 3. London: Taylor and Francis: 345–346.
  2. ↑ Mayr, E.; Cottrell, G.W., eds. (1979). "Check-list of birds of the world". Vol. 1 (2nd ed.). Cambridge, Massachusetts: Museum of Comparative Zoology: 384–385.
  3. ↑ 3.0 3.1 3.2 Rasmussen, P.C.; Anderton, J.C. (2005). "Birds of South Asia. The Ripley Guide". Vol. 2. Washington DC: Smithsonian Institution: 108.
  4. ↑ 4.0 4.1 Ali, S.; Ripley, S.D. (1978). "Handbook of the Birds of India and Pakistan". Vol. 1 (2nd ed.). New Delhi: Oxford University Press: 270–272.
  5. ↑ Taher, Humayun (1992). "Rufous bellied Hawk-Eagle Hieraaetus kienerii (E. Geoffroy) in Andhra Pradesh". Journal of the Bombay Natural History Society. 89 (3): 368.
  6. ↑ Sajan, S.K.; Xaxa, Sanjay; Bakshi, M.K.; Srivastava, D.S. (2016). "First Sighting of Rufous-Bellied Eagle Hieraaetus kienerii (E. Geoffroy, 1835) from Jharkhand, India". Indian Forester. 142 (4): 405–406.
  7. ↑ Baker, E.C.S. (1928). "Fauna of British India. Birds". Vol. 5 (2nd ed.). London: Taylor and Francis: 80–82.
  8. ↑ Bligh, Samuel (1886). "Note on Kiener's Hawk-Eagle". Ibis. 28 (3): 299.
  9. ↑ Kinloch, A.M. (1907). "The nesting of the Rufous-bellied Hawk-Eagle (Lophotriorchis kieneri)". Journal of the Bombay Natural History Society. 17 (4): 1027–1028.

बाहरी कड़ियाँ

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