स्लेंडर लोरिस (Slender Lorises)
स्लेंडर लोरिस (अंग्रेज़ी: Slender Loris, वंश: Loris) लोरिसिडे (Lorisidae) कुल से संबंधित छोटे आकार का एक निशाचर प्राइमेट स्तनधारी जीव है। तेलुगु में इसे 'देवांग पिल्ली' (దేవాంగ పిల్లి) और हिंदी में सामान्यतः 'शर्मीला वानर' या 'लोरिस' कहा जाता है।
लोरिसिडे परिवार के अंतर्गत लोरिस (Loris) वंश के जीवों को पतले लोरिस (Slender Loris) और निक्टिसेबस (Nycticebus) वंश के जीवों को धीमे लोरिस (Slow Loris) कहा जाता है। स्लेंडर लोरिस की मुख्य रूप से दो प्रजातियाँ पाई जाती हैं:
- लाल स्लेंडर लोरिस (Red Slender Loris - Loris tardigradus)
- ग्रे (धूसर) स्लेंडर लोरिस (Gray Slender Loris - Loris lydekkerianus)
ये मुख्य रूप से भारत (विशेषकर दक्षिणी भारत के पश्चिमी और पूर्वी घाट) और श्रीलंका के उष्णकटिबंधीय वर्षावनों, शुष्क पर्णपाती जंगलों और तटीय जंगलों में पाए जाते हैं।
शारीरिक विवरण
स्लेंडर लोरिस का आकार लगभग 6 से 15 इंच (15 से 25 सेमी) और वजन 275 ग्राम से 348 ग्राम के बीच होता है।
- इनका सिर गोल, थूथन नुकीली और आँखें अत्यधिक बड़ी, गोल व भूरी होती हैं, जो रात के अंधेरे में देखने के लिए अनुकूलित हैं। आँखों के चारों ओर गहरे भूरे या काले रंग का छल्ला होता है।
- इनके कान बड़े और गोल होते हैं। इनके शरीर पर पूंछ लगभग नगण्य (अनुपस्थित) होती है।
- इनके हाथ-पैर पतले और लंबे होते हैं, तथा अंगूठे की पकड़ पेड़ों की टहनियों को मजबूती से पकड़ने के लिए अत्यधिक कुशल होती है।
- शरीर का ऊपरी फर लाल-भूरा या धूसर (ग्रे) होता है, जबकि पेट और छाती का निचला हिस्सा सफेद या हल्का पीला होता है।
- इनका मुख्य आहार कीड़े-मकोड़े (विशेषकर जहरीले कीट), छिपकलियाँ, पक्षियों के अंडे, फल और पेड़ की पत्तियाँ हैं। इनका औसत जीवनकाल 12 से 15 वर्ष होता है।
खतरे एवं संरक्षण
भारत और श्रीलंका में अंधविश्वास और पारंपरिक लोक-दवाओं में उपयोग के कारण इस दुर्लभ जीव को भारी संकट का सामना करना पड़ रहा है:
- **अंधविश्वास व तंत्र-मंत्र:** कुछ स्थानीय और जनजातीय मान्यताओं के अनुसार इनके शरीर और बड़ी आँखों में जादुई व औषधीय गुण माने जाते हैं, जिसके चलते तांत्रिक क्रियाओं के लिए इनका अवैध शिकार किया जाता है।
- **अवैध व्यापार:** विदेशी पालतू जीवों के बाजार में 'लिलिपुट' या अनोखे पालतू जानवर के रूप में बेचने के लिए इनकी तस्करी की जाती है।
- **आवास विनाश:** कृषि विस्तार, सड़कों के निर्माण और वनों की कटाई के कारण इनके प्राकृतिक आवास तेजी से खंडित हो रहे हैं।
भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत स्लेंडर लोरिस को अनुसूची-1 में रखा गया है, जिसके अनुसार इन्हें पकड़ना, मारना या व्यापार करना एक गैर-जमानती और दंडनीय अपराध है।
संदर्भ
बाहरी कड़ियाँ
विकिमीडिया कॉमन्स पर स्लेंडर लोरिस (Loris) से सम्बन्धित मीडिया उपलब्ध है।
विकिस्पीशीज़ पर लोरिस से सम्बन्धित प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध है।
श्रेणी:जंतु विज्ञान श्रेणी:स्तनधारी श्रेणी:प्राइमेट श्रेणी:लोरिसिडे श्रेणी:भारत के स्तनधारी श्रेणी:निशाचर प्राणी
