न्यूटन का सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम (Newton's Law of Universal Gravitation)
न्यूटन का सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम (Newton's Law of Universal Gravitation) चिरसम्मत यांत्रिकी का एक मूलभूत सिद्धांत है। इसके अनुसार ब्रह्मांड में स्थित प्रत्येक पदार्थ कण अन्य प्रत्येक कण को अपनी ओर आकर्षित करता है।[1]
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
जोहान्स केप्लर द्वारा 1619 में ग्रहीय गति के नियम प्रतिपादित किए जाने के बाद, सर आइजैक न्यूटन ने चंद्रमा की कक्षीय गति का विश्लेषण किया।
चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा लगभग में पूरी करता है तथा पृथ्वी से चंद्रमा की औसत दूरी लगभग है। इन मानों के आधार पर न्यूटन ने गणना की कि चंद्रमा का पृथ्वी की ओर अभिकेंद्रीय त्वरण लगभग है। गिरते हुए सेब के प्रेक्षण से न्यूटन ने निष्कर्ष निकाला कि जिस गुरुत्वीय आकर्षण के कारण वस्तुएं पृथ्वी की सतह पर गिरती हैं, वही आकर्षण बल चंद्रमा को पृथ्वी के चारों ओर अपनी कक्षा में बांधे रखता है।
नियम का कथन
न्यूटन के नियम के अनुसार: > "किन्हीं दो बिंदु-द्रव्यमानों के मध्य कार्यरत पारस्परिक गुरुत्वाकर्षण बल () उनके द्रव्यमानों () के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती तथा उनके केंद्रों के बीच की दूरी () के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।"
गणितीय रूप में:
दोनों संबंधों को मिलाने पर:
जहाँ:
- = दोनों पिंडों के बीच लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल
- = दोनों पिंडों के द्रव्यमान
- = दोनों द्रव्यमानों के केंद्रों के बीच की दूरी
- = सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक (Universal Gravitational Constant)
सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक ()
एक सार्वत्रिक स्थिरांक है जिसका मान माध्यम अथवा पिंडों की प्रकृति पर निर्भर नहीं करता है।
CODATA के अनुसार इसका प्रायोगिक मान:
विमीय सूत्र:
संदर्भ
- ↑ Newton, Isaac (1687). Philosophiæ Naturalis Principia Mathematica, Jussu Societatis Regiæ ac Typis Josephi Streater.
