नाइडेरिया (Cnidaria)

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नाइडेरिया (लैटिन: Cnidaria) यूमेटाज़ोआ (Eumetazoa) के अंतर्गत आने वाले जंतुओं का एक महत्वपूर्ण संघ (Phylum) है। इस संघ के जीव मुख्य रूप से समुद्री पर्यावरण में निवास करते हैं, हालांकि कुछ प्रजातियाँ मीठे पानी में भी पाई जाती हैं। इनमें से कई स्थानबद्ध (sessile) होते हैं, जबकि अन्य स्वतंत्र रूप से तैरने वाले होते हैं। इनका शरीर द्विस्तरीय (diploblastic) होता है और ये अरीय सममिति (radial symmetry) प्रदर्शित करते हैं।

सामान्य लक्षण

  • ऊतक स्तर का संगठन: ये ऊतक स्तर के शारीरिक संगठन वाले बहुकोशिकीय (मेटाज़ोआ) जंतु हैं, जिनमें अंगों का अभाव होता है।
  • जीवन शैली: ये जीव एकल (solitary) या निवही (colonial) दोनों प्रकार के हो सकते हैं। इनके शरीर के मध्य में मुख होता है, जो स्पर्शकों (tentacles) के वलय से घिरा रहता है।
  • द्विस्तरीय संरचना: इनका शरीर मुख्य रूप से दो परतों से बना होता है—बाहरी परत एपिडर्मिस (बाह्यत्वचा) और आंतरिक परत गैस्ट्रोडर्मिस (अंतःत्वचा)। इन दोनों के बीच एक अकोशिकीय, जेली जैसी परत होती है जिसे मेसोग्लिया (Mesoglea) कहते हैं।
  • शारीरिक सममिति: इनका शरीर सामान्यतः अरीय सममित (radially symmetrical) होता है, जिससे इन्हें किसी भी केंद्रीय अक्ष से दो समान भागों में काटा जा सकता है। हालांकि, समुद्री एनीमोन जैसे कुछ जीवों में द्विपार्श्व अरीय सममिति (biradial symmetry) पाई जाती है।
  • जठरवाही गुहा: इनमें एक विशाल केंद्रीय गुहा होती है जिसे सिलेंटेरॉन (Coelenteron) कहा जाता है। इसी गुहा के कारण इनका प्रारंभिक नाम सिलेंटरेटा (Coelenterata) पड़ा था। बाद में दंश कोशिकाओं की उपस्थिति के कारण इन्हें 'नाइडेरिया' नाम दिया गया।
  • अपूर्ण पाचन तंत्र: सिलेंटेरॉन एक मुख के माध्यम से बाहर खुलता है। यही छिद्र मुख (भोजन ग्रहण करने) और गुदा (अपशिष्ट बाहर निकालने) दोनों का कार्य करता है।
  • पाचन प्रक्रिया: इनमें कोशिकेतर (extracellular) पाचन सिलेंटेरॉन गुहा में और अंतःकोशिकीय (intracellular) पाचन गैस्ट्रोडर्मिस की कोशिकाओं के अंदर होता है।
  • दंश कोशिकाएं (Cnidocytes): यह इस संघ की सबसे विशिष्ट पहचान है। शरीर की भित्ति और स्पर्शकों पर मौजूद ये कोशिकाएं (Stinging cells) शिकार पकड़ने, सुरक्षा करने और किसी सतह से चिपकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
  • अभाव: इनमें विशेष श्वसन, परिसंचरण या उत्सर्जन तंत्र नहीं पाए जाते हैं। गैसों का आदान-प्रदान शरीर की सतह से विसरण (diffusion) द्वारा होता है।
  • तंत्रिका तंत्र: इनमें तंत्रिका कोशिकाएं अध्रुवीय (apolar) होती हैं, जो मिलकर एक प्रारंभिक तंत्रिका जाल (nerve net) का निर्माण करती हैं।
  • प्रजनन और विकास: ये मुकुलन (budding) के माध्यम से अलैंगिक प्रजनन करते हैं। इसके अलावा लैंगिक प्रजनन भी पाया जाता है। इनका विकास अप्रत्यक्ष होता है, जिसमें प्लान्यूला (Planula) नामक स्वतंत्र रूप से तैरने वाली सिलियायुक्त लार्वा अवस्था पाई जाती है।

वर्गीकरण

नाइडेरिया संघ को मुख्य रूप से निम्नलिखित वर्गों में विभाजित किया गया है:

  • हाइड्रोज़ोआ (Hydrozoa): ये मीठे और खारे दोनों जलों में पाए जाते हैं। उदाहरण: हाइड्रा (Hydra), ओबेलिया (Obelia)।
  • स्काइफोज़ोआ (Scyphozoa): इनमें मुख्य रूप से मेड्यूसा अवस्था प्रभावी होती है। उदाहरण: ऑरेलिया या जेलीफ़िश (Jellyfish)।
  • एंथोझोआ (Anthozoa): ये केवल पॉलिप रूप में पाए जाते हैं और मेड्यूसा अवस्था अनुपस्थित होती है। उदाहरण: प्रवाल (Corals), समुद्री एनीमोन (Sea Anemone)।

संदर्भ

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