तापमापी (Thermometer)
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तापमापी (Thermometer / थर्मामीटर) वह वैज्ञानिक उपकरण है जिसका उपयोग किसी वस्तु, वातावरण या शरीर का तापमान मापने के लिए किया जाता है। तापमान किसी पदार्थ के गर्म या ठंडे होने की तीव्रता का संख्यात्मक मान होता है।
कार्य सिद्धांत
पारंपरिक तापमापी मुख्य रूप से इस भौतिक सिद्धांत पर कार्य करते हैं कि "गर्म करने पर द्रव और गैसें फैलती हैं (उष्मीय प्रसार होता है)।"
सामान्य तापमापियों में तरल के रूप में पारा (Mercury) या अल्कोहल (Alcohol) का उपयोग किया जाता है:
- पारा: इसका प्रसार गुणांक एकसमान होता है, यह काँच की दीवार से चिपकता नहीं है और उच्च तापमान मापने के लिए उपयुक्त है।
- अल्कोहल: इसका हिमांक बहुत कम (−114 °C) होता है, अतः यह अत्यधिक ठंडे वातावरण में तापमान मापने के लिए उत्तम है।
इतिहास एवं विकास
तापमान मापने के प्रारंभिक सिद्धांतों की जानकारी यूनानी दार्शनिकों को लगभग 2000 वर्ष पूर्व थी। आधुनिक थर्मामीटर का विकास 16वीं–17वीं शताब्दी में 'थर्मोस्कोप' से हुआ:
- प्रारंभिक प्रयोग: बीजान्टियम के फिलो और अलेक्जेंड्रिया के हीरो ने दिखाया कि हवा गर्म होने पर फैलती है।
- गैलीलियो गैलीली (1593): गैलीलियो ने पानी और हवा के विस्तार पर आधारित पहला थर्मोस्कोप विकसित किया।
- पैमाने का विकास: 1611–1613 के बीच फ्रांसिस्को साग्रिडो और सैंटोरियो सैंटोरियो ने थर्मोस्कोप पर संख्यात्मक पैमाना अंकित किया।
- थर्मामीटर शब्द: यह शब्द पहली बार 1624 में आया, जो ग्रीक शब्द थर्मोस (उष्मा) और मेट्रोन (माप) से मिलकर बना है।
- मानकीकरण: 1665 में क्रिश्चियन ह्यूजेंस ने पानी के हिमांक और क्वथनांक को निश्चित बिंदु माना। 1724 में डैनियल गेब्रियल फारेनहाइट ने पारे के थर्मामीटर के साथ फारेनहाइट पैमाना प्रस्तावित किया और 1742 में ऐन्डर्स सेल्सियस ने सेल्सियस पैमाना विकसित किया।
- चिकित्सा में उपयोग: 1866 में सर थॉमस क्लिफोर्ड अल्बट ने पॉकेट आकार का व्यावहारिक क्लिनिकल थर्मामीटर बनाया।
प्रमुख तापमान पैमाने
1. सेल्सियस पैमाना (°C)
इसकी खोज 1742 में स्वीडिश खगोलशास्त्री ऐन्डर्स सेल्सियस ने की थी।
- अधो स्थिर बिंदु (LFP / बर्फ का गलनांक): 0 °C
- ऊर्ध्व स्थिर बिंदु (UFP / जल का क्वथनांक): 100 °C
- पैमाने को 100 समान भागों (डिग्री) में विभाजित किया गया है।
2. फारेनहाइट पैमाना (°F)
इसकी खोज 1724 में जर्मन भौतिकविद् डैनियल गेब्रियल फारेनहाइट ने की थी।
- अधो स्थिर बिंदु (LFP): 32 °F
- ऊर्ध्व स्थिर बिंदु (UFP): 212 °F
- पैमाने को 180 समान भागों में विभाजित किया गया है।
3. रेओमर पैमाना (°R या °Ré)
इसकी खोज 1730 में फ्रांसीसी वैज्ञानिक रेने एंटोनी फेरचॉल्ट डी रेओमर ने की थी।
- अधो स्थिर बिंदु (LFP): 0 °R
- ऊर्ध्व स्थिर बिंदु (UFP): 80 °R
- पैमाने को 80 समान भागों में विभाजित किया गया है।
4. केल्विन पैमाना (K)
यह तापमान का SI मात्रक है। इसका 0 K 'परम शून्य' (Absolute Zero) कहलाता है, जहाँ पदार्थ की आण्विक गति लगभग शून्य हो जाती है।
तापमान पैमानों के बीच संबंध
विभिन्न पैमानों के बीच का मूल गणितीय संबंध:
सरल रूप में:
| रूपांतरण | सूत्र |
|---|---|
| Celsius से Fahrenheit | |
| Fahrenheit से Celsius | |
| Celsius से Réaumur | |
| Réaumur से Celsius | |
| Celsius से Kelvin |
विभिन्न तापमान पैमानों की तुलना सारणी
| Celsius (°C) | Fahrenheit (°F) | Kelvin (K) | Rankine (°R) | Delisle (°De) | Newton (°N) | Réaumur (°Ré) | Rømer (°Rø) |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 300.00 | 572.00 | 573.15 | 1031.67 | -300.00 | 99.00 | 240.00 | 165.00 |
| 200.00 | 392.00 | 473.15 | 851.67 | -150.00 | 66.00 | 160.00 | 112.50 |
| 100.00 | 212.00 | 373.15 | 671.67 | 0.00 | 33.00 | 80.00 | 60.00 |
| 50.00 | 122.00 | 323.15 | 581.67 | 75.00 | 16.50 | 40.00 | 33.75 |
| 37.00 | 98.60 | 310.15 | 558.27 | 94.50 | 12.21 | 29.60 | 26.93 |
| 0.00 | 32.00 | 273.15 | 491.67 | 150.00 | 0.00 | 0.00 | 7.50 |
| -40.00 | -40.00 | 233.15 | 419.67 | 210.00 | -13.20 | -32.00 | -13.50 |
| -100.00 | -148.00 | 173.15 | 311.67 | 300.00 | -33.00 | -80.00 | -45.00 |
| -273.15 | -459.67 | 0.00 | 0.00 | 559.73 | -90.14 | -218.52 | -135.90 |
निर्माण एवं क्रियाविधि के आधार पर तापमापी के प्रकार
- द्रव तापमापी (Liquid Thermometers): काँच की नली में पारे या अल्कोहल के प्रसार पर आधारित। पारे वाले थर्मामीटर −39 °C से 357 °C तक तथा अल्कोहल वाले −114 °C से 78 °C तक कार्य करते हैं।
- गैस तापमापी (Gas Thermometers): स्थिर आयतन या स्थिर दाब पर गैस के प्रसार पर कार्य करते हैं। यह अत्यंत संवेदनशील और मानक तापमापी होते हैं।
- प्रतिरोध तापमापी (Resistance Thermometers - RTD): तापमान बदलने पर धातुओं (जैसे प्लैटिनम) के विद्युत प्रतिरोध में होने वाले परिवर्तन को मापते हैं।
- उष्ण-वैद्युत तापमापी (Thermoelectric Thermometers / Thermocouple): सीबैक प्रभाव (Seebeck Effect) पर आधारित, जिसमें दो विभिन्न धातुओं के जोड़ों के बीच तापमान अंतर से विद्युत-वाहक बल (EMF) उत्पन्न होता है।
- विकिरण तापमापी / पाइरोमीटर (Radiation Pyrometer): अत्यधिक उच्च तापमान (भट्ठियों, पिघले लोहे, सूर्य) को बिना छुए उत्सर्जित थर्मल विकिरण के आधार पर मापने हेतु प्रयुक्त।
- डिजिटल एवं इन्फ्रारेड थर्मामीटर: इलेक्ट्रॉनिक सेंसर और इंफ्रारेड किरणों की सहायता से त्वरित और संपर्क-रहित (Non-contact) तापमान मापते हैं।
सिक्स का अधिकतम-न्यूनतम तापमापी (Six's Maximum and Minimum Thermometer)
इसका आविष्कार 1782 में जेम्स सिक्स ने किया था। यह U-आकार की काँच की नली से बना होता है जिसका उपयोग मौसम विज्ञान में किसी स्थान के 24 घंटे के दौरान दर्ज किए गए अधिकतम और न्यूनतम तापमान को मापने के लिए किया जाता है। इसमें अल्कोहल और पारे के साथ छोटे चुंबकीय सूचकांक (Indices) लगे होते हैं जो तापमान के चरम मानों को दर्ज रखते हैं।
तापमापी का निर्माण एवं अंशांकन (Calibration)
- संरचना: इसमें समान व्यास वाली एक बहुत बारीक केशिका नली (Capillary tube) होती है जिसके निचले सिरे पर एक बल्ब जुड़ा होता है। बल्ब और नली के कुछ भाग में तरल (पारा) भरकर वायु निकालकर सील कर दिया जाता है।
- अंशांकन विधि:
- निम्न स्थिर बिंदु: थर्मामीटर को पिघलती हुई शुद्ध बर्फ में रखा जाता है और पारे के तल को 0 °C चिन्हित किया जाता है।
- उच्च स्थिर बिंदु: इसे हिप्सोमीटर (उबलते पानी की भाप) में रखा जाता है और पारे के तल को 100 °C चिन्हित किया जाता है।
- दोनों बिंदुओं के बीच की दूरी को आवश्यक पैमानों के अनुसार समान भागों में विभाजित कर दिया जाता है।
ज्वरमापी / क्लिनिकल थर्मामीटर (Clinical Thermometer)
मानव शरीर का तापमान मापने के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया तापमापी क्लिनिकल थर्मामीटर कहलाता है।
- इसका मापन परास 35 °C से 42 °C (या 95 °F से 108 °F) तक होता है।
- इसमें बल्ब के ठीक ऊपर एक विशेष संकुचन (Kink / Constriction) होता है। जब इसे मुँह या काँख से बाहर निकाला जाता है, तो यह संकुचन पारे को स्वतः नीचे गिरने से रोकता है, जिससे पाठ्यांक सटीकता से पढ़ा जा सकता है। उपयोग से पूर्व इसे हल्का झटका देकर पारा वापस बल्ब में लाया जाता है।
मुख्य उपयोग
- चिकित्सा में: मानव व पशुओं के शारीरिक तापमान और बुखार की जांच हेतु।
- मौसम विज्ञान में: दैनिक वायुमंडलीय तापमान, अधिकतम-न्यूनतम तापमान और मौसम पूर्वानुमान के लिए।
- उद्योगों व प्रयोगशालाओं में: रासायनिक अभिक्रियाओं, धातु शोधन, खाद्य प्रसंस्करण और बॉयलर निगरानी हेतु।
- घरेलू उपकरणों में: रेफ्रिजरेटर, ओवन और एयर कंडीशनर के तापमान नियंत्रण में।
