जायफल (Nutmeg)
| Scientific Classification | |||
|---|---|---|---|
| Kingdom: | Plantae
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जायफल (Nutmeg) मायरिस्टिकेसी (Myristicaceae) कुल का एक सुगंधित मसाला वृक्ष है। इसका वैज्ञानिक नाम मिरिस्टिका फ्रैग्रेंस (Myristica fragrans) है। यह लगभग 10 मीटर की ऊंचाई तक बढ़ने वाला वृक्ष है। आयुर्वेद में इसे "जातिफल" (सुगंध युक्त फल), "जातिकोश" (सुगंधित कोश वाला), और "मदशौंड" (शराब की तरह नशा उत्पन्न करने वाला) कहा जाता है।
विभिन्न भाषाओं में नाम
- तेलुगु: जाजिकाय
- संस्कृत: जातिफल
- हिंदी: जायफल
- लैटिन: मिरिस्टिका फ्रैग्रेंस
- कुल: मायरिस्टिकेसी (Myristicaceae)
स्वभाव और संरचना
जायफल का फल अंडाकार या गोलाकार होता है। इसके फल, पत्तों और छाल (त्वचा) में सुगंधित तेल (Essential oil) पाया जाता है। इसमें मिरिस्टिक (Myristic) और मिरिस्टिसिन (Myristicin) एसिड होते हैं। इनके साथ ही इसमें फिक्स्ड ऑयल (Fixed oil) और पेक्टिन (Pectin) भी मौजूद होते हैं।
आयुर्वेदिक गुण
- रस: कटु (कड़वा), तिक्त
- गुण: लघु, तीक्ष्ण
- वीर्य: उष्ण वीर्य (गर्म प्रभाव)
- विपाक: कटु विपाक
- दोष प्रभाव: कफ और वात शामक (कफ-वात हर)
- कर्म: दीपन, रोचन, ग्राही, स्वर्य (स्वर के लिए लाभकारी)
पोषक तत्व
जायफल में निम्नलिखित पोषक तत्व पाए जाते हैं:
- कार्बोहाइड्रेट: 119 ग्राम
- प्रोटीन: 7.5 ग्राम
- कैल्शियम: 119 ग्राम
- फास्फोरस: 238 मि.ग्रा.
- आयरन (लौह): 4.5 ग्राम
औषधीय उपयोग और चिकित्सा
आयुर्वेद में इसका उपयोग अतिसार (दस्त), ग्रहणी (IBS), तृष्णा (अत्यधिक प्यास), कास (खांसी), पीनस (जुकाम), शोष (सूखापन/क्षय), हृद्रोग (हृदय रोग), चर्म रोग (त्वचा विकार), उल्टी (वमन) और मुखवैरस्य (मुंह का स्वाद खराब होना) में किया जाता है।
- यौन शक्ति: जायफल के चूर्ण को दूध में मिलाकर सेवन करने से यौन शक्ति बढ़ती है। जायफल के चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर सेवन करने से यह एक सेक्सुअल टॉनिक की तरह कार्य करता है।
- अनिद्रा, सिरदर्द और अवसाद (डिप्रेशन): जायफल के चूर्ण को दूध के साथ लेने से अच्छी नींद आती है, मन शांत रहता है और सिरदर्द कम होता है। डिप्रेशन और हाइपरटेंशन (उच्च रक्तचाप) वाले लोगों के लिए इसे आंवले (आमलकी) के रस के साथ लेना लाभदायक होता है।
