घूर्णन गति (Rotational Motion)
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घूर्णन गति (Rotational Motion) वह गति है जिसमें कोई वस्तु किसी निश्चित बिंदु या घूर्णन अक्ष के चारों ओर एक वक्र पथ में निरंतर परिक्रमा करती है। इस प्रकार की गति में वस्तु पर एक बल सदैव उसकी गति की दिशा के लंबवत तथा केंद्र बिंदु की ओर कार्यरत रहता है। सौरमंडल में सूर्य के चारों ओर ग्रहों की गति, परमाणु में नाभिक के चारों ओर इलेक्ट्रॉनों की गति, छत के पंखे के ब्लेडों की गति तथा घड़ी की सुइयों का घूमना घूर्णन गति के प्रमुख उदाहरण हैं।
वस्तु का रेखीय वेग () तथा घूर्णन केंद्र से वस्तु की दूरी (), जिसे त्रिज्या सदिश (Radius Vector) कहा जाता है, घूर्णन गति के प्रमुख निर्धारक चर हैं।
वृत्तीय एवं एकसमान वृत्तीय गति
जब किसी घूर्णन गति में त्रिज्या सदिश का परिमाण () सदैव स्थिर रहता है, तो उसे वृत्तीय गति (Circular Motion) कहा जाता है।
वृत्तीय गति में गतिशील वस्तु में रेखीय विस्थापन () के साथ-साथ कोणीय विस्थापन (), रेखीय वेग () के साथ कोणीय वेग (), तथा रेखीय त्वरण () के साथ कोणीय त्वरण () उपस्थित होते हैं। रेखीय चाल और कोणीय चाल के बीच का संबंध निम्नलिखित सूत्र द्वारा व्यक्त किया जाता है:
यदि वृत्तीय गति में वस्तु की कोणीय चाल स्थिर रहे, तो उसे एकसमान वृत्तीय गति (Uniform Circular Motion) कहते हैं। यद्यपि इसमें चाल का परिमाण स्थिर रहता है, किंतु प्रत्येक बिंदु पर वेग की दिशा निरंतर परिवर्तित होती रहती है।
अभिकेंद्रीय त्वरण एवं अभिकेंद्रीय बल
वेग की दिशा में निरंतर परिवर्तन के कारण वस्तु में एक त्वरण उत्पन्न होता है, जिसकी दिशा सदैव वृत्त के केंद्र की ओर तथा गति की दिशा के लंबवत होती है। इसे अभिकेंद्रीय त्वरण (Centripetal Acceleration) कहते हैं:
किसी वस्तु को वृत्ताकार पथ पर बनाए रखने के लिए केंद्र की ओर आवश्यक बल को अभिकेंद्रीय बल (Centripetal Force) कहते हैं। यदि वस्तु का द्रव्यमान हो, तो:
प्रमुख उदाहरण:
- सूर्य और ग्रह के मध्य लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल अभिकेंद्रीय बल का कार्य करता है।
- नाभिक और इलेक्ट्रॉन के मध्य लगने वाला स्थिर-विद्युत आकर्षण बल अभिकेंद्रीय बल प्रदान करता है।
- मोड़ पर मुड़ते समय वाहन के टायरों और सड़क के बीच का घर्षण बल अभिकेंद्रीय बल उत्पन्न करता है।
सड़कों का बंकन (Banking of Roads)
मोड़ पर तेज गति से मुड़ते समय केवल घर्षण बल पर्याप्त अभिकेंद्रीय बल प्रदान नहीं कर पाता, जिससे वाहन के फिसलने का खतरा रहता है। दोपहिया वाहन चालक मोड़ की ओर झुककर संतुलन बना लेते हैं, किंतु चौपहिया वाहनों को झुकाना संभव नहीं होता।
इसलिए मोड़ पर सड़क के बाहरी किनारे को आंतरिक किनारे की तुलना में थोड़ा ऊँचा बनाया जाता है। इसे सड़क का बंकन (Banking of Roads) कहते हैं। सुरक्षित मोड़ के लिए बंकन कोण () का संबंध निम्नलिखित होता है:
जहाँ:
- = बंकन कोण (Banking angle)
- = वाहन की सुरक्षित चाल
- = मोड़ की त्रिज्या
- = गुरुत्वीय त्वरण
आवर्त गति एवं सरल आवर्त गति
जब कोई वस्तु एक निश्चित समयांतराल में अपने पथ को दोहराती है, तो उसे आवर्त गति (Periodic Motion) कहते हैं।
यदि कोई कण अपनी माध्य स्थिति (Mean Position) के दोनों ओर दोलन करता है, जहाँ उसका त्वरण विस्थापन के समानुपाती तथा दिशा सदैव माध्य स्थिति की ओर हो, तो इसे सरल आवर्त गति (Simple Harmonic Motion - SHM) कहते हैं:
निर्देश तंत्र एवं छद्म बल (Pseudo Forces)
न्यूटन के प्रथम गति नियम के अनुसार, बाह्य बल की अनुपस्थिति में वस्तु अपनी विरामावस्था या सरल रेखीय एकसमान गति की अवस्था को बनाए रखती है। इस प्रवृत्ति को जड़त्व (Inertia) कहते हैं।
वस्तु की गति का अध्ययन करने के लिए प्रयुक्त निर्देशांक अक्षों के निकाय को निर्देश तंत्र (Frame of Reference) कहते हैं:
- जड़त्वीय निर्देश तंत्र (Inertial Frame): न्यूटन के नियम पूरी तरह मान्य होते हैं (जैसे स्थिर या एकसमान वेग से गतिशील तंत्र)।
- अजड़त्वीय निर्देश तंत्र (Non-inertial Frame): त्वरित अथवा घूर्णनशील तंत्र। इनमें न्यूटन के नियमों को लागू करने के लिए वास्तविक बलों के अतिरिक्त काल्पनिक बलों की आवश्यकता होती है, जिन्हें छद्म बल (Pseudo Force) कहा जाता है।
छद्म बलों के उदाहरण:
- अपकेंद्रीय बल (Centrifugal Force): घूर्णन तंत्र में स्थित वस्तु पर केंद्र से बाहर की ओर अनुभव होने वाला आभासी बल।
- कोरिओलिस बल (Coriolis Force): घूर्णन तंत्र में गतिमान वस्तु पर कार्य करने वाला विक्षेपक आभासी बल।
