कोकीन (Cocaine)





कोकीन (Cocaine) एक प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला एल्कलॉइड (Alkaloid) है। यह एक अत्यंत शक्तिशाली और व्यसनकारी (addictive) उत्तेजक (stimulant) दवा है। हजारों वर्षों से, दक्षिण अमेरिका के लोग इसके उत्तेजक प्रभावों के लिए कोका की पत्तियों (Erythroxylum coca) को चबाते रहे हैं।[1][2] इस पौधे को स्थानीय लोग 'अमेजोनियन कोका' (Amazonian coca) कहते हैं, जिसका वैज्ञानिक नाम एरिथ्रोक्साइलम कोका है। यह एरिथ्रोक्सिलेसी (Erythroxylaceae) परिवार से संबंधित है। शुद्ध रूप में, कोकीन एक सफेद क्रिस्टलीय पाउडर होता है।
इतिहास
लगभग 100 साल पहले कोका के पौधे से कोकीन हाइड्रोक्लोराइड (Cocaine hydrochloride) नामक रसायन को शुद्ध किया गया था। 1900 के दशक की शुरुआत में, विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए विकसित किए गए कई टॉनिक और दवाओं में शुद्ध कोकीन मुख्य सक्रिय घटक के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। सिंथेटिक स्थानीय एनेस्थेटिक (local anesthetic) के विकास से पहले, सर्जन सर्जरी के दौरान दर्द को रोकने के लिए कोकीन का उपयोग करते थे।[3]
हालांकि, शोध से पता चला है कि कोकीन के बार-बार उपयोग से मस्तिष्क की संरचना और कार्यप्रणाली बदल सकती है, जिससे व्यक्ति इसका गंभीर आदी हो जाता है। आज, कोकीन एक 'अनुसूची II' (Schedule II) दवा है, जिसका अर्थ है कि इसके दुरुपयोग की संभावना बहुत अधिक है, लेकिन डॉक्टर द्वारा इसका उपयोग कान, नाक और गले की सर्जरी में स्थानीय एनेस्थीसिया के रूप में वैध चिकित्सा प्रयोजनों के लिए किया जा सकता है।[4]
दक्षिण अमेरिका (कोलंबिया, पेरू, बोलीविया) में 4,000 से अधिक वर्षों से कोका का उपयोग औषधि और उत्तेजक के रूप में किया जा रहा है। 16वीं सदी में वहां पहुंचे यूरोपीय खोजकर्ताओं ने इसके उपयोग को देखा था। 19वीं सदी के मध्य तक कोका की खेती एंडीज पर्वत श्रृंखला तक ही सीमित थी।[5] वर्तमान में दुनिया भर में अवैध कोकीन का लगभग 70 से 80 प्रतिशत कोलंबिया में उत्पादित होता है।
पहला संश्लेषण (First Synthesis)
मानव द्वारा कोकीन के उपयोग का पहला विवरण फ्लोरेंटाइन यात्री अमेरिगो वेस्पुची (1451-1512) के संस्मरणों में मिलता है। 1859-1860 में जर्मन रसायनज्ञ अल्बर्ट नीमन (Albert Niemann) ने पहली बार कोका की पत्तियों से कोकीन को अलग किया था।[6] उनके बाद उनके छात्र विल्हेम लॉसेन (Wilhelm Lossen) ने 1865 में इसका सही रासायनिक सूत्र निर्धारित किया।
1880 में बेसिल वॉन अनरेप (Basil von Anrep) ने मनुष्यों पर कोकीन के प्रभाव का अध्ययन प्रकाशित किया और इसे सर्जिकल एनेस्थीसिया के रूप में अनुशंसित किया। अंततः, कार्ल कोलर (Karl Koller) ने 1884 में नेत्र विज्ञान (ophthalmology) में कोकीन के स्थानीय एनेस्थेटिक उपयोग का सफल प्रदर्शन किया।[7]
पौधे का आवास और खेती
कोका का पौधा मुख्य रूप से पेरू, बोलीविया और इक्वाडोर के जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगता है और कई अन्य देशों में इसकी खेती की जाती है।[5] पश्चिमी गोलार्ध में एरिथ्रोक्साइलम की 200 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं, लेकिन केवल 17 प्रजातियों से कोकीन का उत्पादन किया जा सकता है। इनमें से केवल दो प्रजातियां (E. coca और E. novogranatense) सबसे अधिक उगाई जाती हैं।[8]
भारत में कोका की खेती का इतिहास
1870 में लंदन के केव बॉटनिकल गार्डन्स से कोका के पौधे सीलोन (श्रीलंका) लाए गए और 1883 में इसे भारत लाया गया। भारत में नीलगिरि पहाड़ियों के ऊपरी इलाकों में इसके सबसे अच्छे परिणाम देखे गए, लेकिन भारत में कोका की खेती कभी भी बड़े पैमाने पर नहीं की गई। 1926 में यह अफवाह फैली कि भारत में बड़े पैमाने पर कोका उगाया जा रहा है, लेकिन जांच में यह गलत पाया गया और यह साबित हुआ कि भारत में इस्तेमाल होने वाली कोकीन बाहर से तस्करी करके लाई गई थी।[9][10]
भारत में कोकीन के उपयोग की शुरुआत
19वीं सदी के अंत में बंगाल और बिहार में इसका उपयोग शुरू हुआ। बिहार के भागलपुर में एक धनी जमींदार द्वारा दांत दर्द के लिए इसका इस्तेमाल किया गया, जो बाद में इसका आदी हो गया, और उसके संपर्क से यह आदत दूसरों में भी फैल गई।[10] बाद में यह देखा गया कि इसे पान (तांबूल) में मिलाकर गुप्त रूप से बेचा जाने लगा, जिसे "लिफाफा" कहा जाता था। इसी तरह यह कलकत्ता, बनारस, लखनऊ, कानपुर, आगरा और दिल्ली जैसे शहरों में फैल गया।[9]
भारत में मादक पदार्थों से संबंधित कानून
भारत सरकार ने नशीली दवाओं पर नियंत्रण के लिए समय-समय पर कई कानून बनाए हैं:
- पॉइज़न एक्ट 1919 (Poison Act 1919): जिसे बाद में 1960 में निरस्त कर दिया गया।
- ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट (1940): इसमें आयात, निर्माण, बिक्री, लेबलिंग और पैकेजिंग के नियम शामिल थे।
- एनडीपीएस एक्ट 1985 (NDPS Act 1985): स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम (Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act) मादक पदार्थों (जैसे कोकीन, हेरोइन, गांजा) के उत्पादन, निर्माण, खेती, कब्जे, बिक्री और खरीद को पूरी तरह से अवैध और दंडनीय बनाता है। इसके तहत विशेष अदालतें स्थापित की गई हैं और सजा 6 महीने से लेकर 20 साल तक के कठोर कारावास तक हो सकती है। बार-बार अपराध करने पर धारा 31A के तहत मृत्युदंड का भी प्रावधान है।[11]
उत्पादन प्रक्रिया (Production Process)
अवैध कोकीन मुख्य रूप से दक्षिण अमेरिका में कोका की पत्तियों से रासायनिक रूप से निकाली जाती है। 1 किलो कोका पेस्ट बनाने के लिए 138 किलो पत्तियों की आवश्यकता होती है। पत्तियों को एक बड़े कुंड में रखा जाता है और इसमें पानी और नाइट्रिक अम्ल का मिश्रण मिलाया जाता है।[12] तीन दिनों तक इसे पैरों से कुचला जाता है। इसके बाद तरल को छाना जाता है और इसमें चूना, गैसोलीन आदि मिलाकर एक पेस्ट बनाया जाता है। इसी कोका पेस्ट को बाद में क्रिस्टलीकरण द्वारा शुद्ध कोकीन (सफेद पाउडर) में बदला जाता है।[12]
भौतिक और रासायनिक गुण
कोकीन बेंजोइक एसिड का एस्टर है और एक नाइट्रोजन युक्त क्षारीय पदार्थ है।[13]
| गुण | मान |
|---|---|
| रंग | सफेद क्रिस्टल या पाउडर[14] |
| आणविक भार (Molar Mass) | 303.4 ग्राम/मोल [15] |
| क्वथनांक (Boiling Point) | 187°C (0.1 mmHg दबाव पर)[16] |
| गलनांक (Melting Point) | 98°C (कोकीन बेस), 190-195°C (कोकीन हाइड्रोक्लोराइड) |
| घुलनशीलता (Solubility) | पानी और अल्कोहल में घुलनशील (मुख्य रूप से HCl लवण)[17] |
| वाष्प दबाव (Vapor Pressure) | 1.91 × 10-7 mmHg (25°C पर) |
| अपवर्तनांक (Refractive Index) | 1.5022 (98°C पर)[16][18] |
चिकित्सीय उपयोग (Medical Uses)
चिकित्सा पेशेवर आज भी विशिष्ट सर्जिकल प्रक्रियाओं में कोकीन का उपयोग करते हैं:
- स्थानीय एनेस्थेटिक (Local Anesthetic): कान, नाक और गले (ENT) की सर्जरी में दर्द को सुन्न करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।
- वासोकॉन्स्ट्रिक्टर (Vasoconstrictor): यह रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ता है, जिससे सर्जरी के दौरान रक्तस्राव कम होता है।[19]
मिलावट (Adulterants)
मुनाफा बढ़ाने के लिए ड्रग डीलर अक्सर शुद्ध कोकीन में कई अन्य पदार्थ मिलाते हैं। इनमें मकई का आटा, टैल्कम पाउडर या बेकिंग सोडा जैसी हानिरहित चीजें शामिल हो सकती हैं, लेकिन कभी-कभी बेहद खतरनाक रसायन भी मिलाए जाते हैं:[20]
- कैफीन (Caffeine)
- लिडोकेन (Lidocaine): जो कोकीन के सुन्न करने वाले प्रभाव की नकल करता है।
- लेवामिसोल (Levamisole): पशुओं के कीड़े मारने की दवा, जो रक्त संबंधी गंभीर विकार पैदा कर सकती है।
- फेंटेनाइल (Fentanyl): यह एक अत्यंत शक्तिशाली सिंथेटिक ओपिओइड है। आजकल डीलर इसे मिलाते हैं, जिसके कारण बहुत अधिक संख्या में ओवरडोज़ मौतें हो रही हैं।
कोकीन और क्रैक कोकीन में अंतर
'क्रैक' (Crack) कोकीन का ठोस, धूम्रपान योग्य (smokable) रूप है। जब पाउडर कोकीन (Cocaine Hydrochloride) को पानी और बेकिंग सोडा (सोडियम बाइकार्बोनेट) के साथ गर्म किया जाता है, तो यह 'रॉक' (ठोस टुकड़ों) में बदल जाता है। गर्म करने पर यह चटकने (crackling) की आवाज़ करता है, इसलिए इसे क्रैक कहा जाता है। यह पाउडर कोकीन की तुलना में कहीं अधिक तेजी से असर करता है और अत्यधिक व्यसनकारी है।
शरीर पर प्रभाव और लत
कोकीन एक तीव्र उत्तेजक है। यह सतर्कता, ऊर्जा, हृदय गति और रक्तचाप को बढ़ाता है, और नींद तथा भूख को कम करता है। इसके अत्यधिक उपयोग (Overdose) से चिंता, शरीर का तापमान बढ़ना, मतिभ्रम, दौरे और मृत्यु तक हो सकती है।[21] यह मस्तिष्क के हिप्पोकैम्पस क्षेत्र में नए न्यूरॉन्स के निर्माण को भी रोकता है, जिससे याददाश्त और मूड पर गहरा असर पड़ता है।
अन्य पदार्थों के साथ इंटरैक्शन
- शराब (Alcohol) के साथ: यह कोकाएथिलीन (cocaethylene) नामक एक अत्यधिक विषैला रसायन बनाता है जो हृदय के लिए घातक है।
- हेरोइन (Heroin) के साथ (Speedball): यह मिश्रण अत्यधिक खतरनाक है और ओवरडोज़ से मृत्यु का कारण बन सकता है।
लत से मुक्ति (Recovery & Detox)
कोकीन की लत से बाहर आना बहुत चुनौतीपूर्ण होता है। जब कोई इसे छोड़ना चाहता है, तो उसे गंभीर अवसाद (depression) और तीव्र लालसा (cravings) का सामना करना पड़ता है। इसका इलाज किसी मेडिकल डिटॉक्स सेंटर (Medical Detox Center) में पेशेवरों की देखरेख में ही किया जाना चाहिए।
> "सबसे बड़ी बात यह याद रखनी है कि जब आप इलाज शुरू करते हैं, तो यह असहज होगा। आपको असहज होना भी चाहिए क्योंकि आप चीजों को बदलने की कोशिश कर रहे हैं। एक बार जब वह असुविधा सहजता में बदलने लगेगी, तो संयम ही आपका नया सामान्य जीवन बन जाएगा।" [22]
संदर्भ
श्रेणी:रसायन विज्ञान श्रेणी:रासायनिक यौगिक श्रेणी:कार्बनिक यौगिक श्रेणी:मादक पदार्थ श्रेणी:पादप रसायन श्रेणी:SciWiki Chemistry
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