एंट्रोपी (Entropy)

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एंट्रोपी (Entropy) मुख्य रूप से ऊष्मागतिकी (Thermodynamics) की एक महत्वपूर्ण और कुछ हद तक अमूर्त (abstract) अवधारणा है। इसे गुणात्मक रूप से समझना थोड़ा कठिन हो सकता है, लेकिन गणित की सहायता से इसका परिमाणात्मक (quantitative) अध्ययन आसानी से किया जा सकता है। अंग्रेजी में "एंट्रोपी" शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम 1865 में जर्मन भौतिक विज्ञानी रुडोल्फ क्लॉसियस (Rudolf Clausius) द्वारा किया गया था। यद्यपि इसका जन्म भौतिकी के ऊष्मागतिकी क्षेत्र में हुआ, लेकिन यह इतनी मूलभूत अवधारणा है कि सूचना सिद्धांत (Information Theory) जैसे अन्य कई वैज्ञानिक क्षेत्रों में भी इसका व्यापक रूप से उपयोग होता है। एंट्रोपी का मूल अर्थ किसी प्रणाली के भीतर "आंतरिक विकास" या ऊर्जा के "विस्तार" से है।

पृष्ठभूमि और ऊर्जा का स्वरूप

भौतिकी (Physics) ऊर्जा के स्वरूप और प्रकृति का अध्ययन करने वाला विज्ञान है। ऊर्जा को कभी नष्ट नहीं किया जा सकता; यह केवल एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित हो सकती है। फैलाव (dispersion) या ऊर्जा का पतला होना (dilution) ऊर्जा का एक विशिष्ट गुण है।

जैसे हम दूरी को किलोमीटर में और वजन को किलोग्राम में मापते हैं, उसी प्रकार ऊर्जा के इस आंतरिक "विस्तार" या "फैलाव" (नष्ट होती हुई कार्यक्षमता) को मापने के लिए जिस इकाई या पैमाने का उपयोग किया जाता है, उसे एंट्रोपी कहा जाता है। ऊष्मागतिकी के द्वितीय नियम (Second Law of Thermodynamics) के अनुसार, ब्रह्मांड या किसी भी पृथक (isolated) प्रणाली की एंट्रोपी कभी कम नहीं होती है, यह हमेशा बढ़ती है।

प्राकृतिक उदाहरण और एंट्रोपी की दिशा

प्रकृति की कुछ घटनाओं को देखकर हम एंट्रोपी को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं:

  • पानी हमेशा ऊंचाई वाले स्थानों से निचले स्थानों की ओर बहता है।
  • हवा हमेशा उच्च दबाव वाले क्षेत्र से निम्न दबाव वाले क्षेत्र की ओर प्रवाहित होती है।
  • यदि एक गर्म पैन को ठंडे स्लैब पर रखा जाए, तो धीरे-धीरे पैन ठंडा हो जाता है और स्लैब गर्म हो जाता है। यहाँ ऊष्मा (heat) गर्म वस्तु से ठंडी वस्तु की ओर प्रवाहित हुई है।

इन सभी उदाहरणों का अर्थ यह है कि पानी, हवा या ऊष्मा हमेशा "उच्च" अवस्था से "निम्न" अवस्था की ओर प्रवाहित होते हैं। ऊर्जा प्रवाह की इसी दिशा में कुछ ऊर्जा व्यर्थ हो जाती है, जिसे हम दोबारा उपयोग में नहीं ला सकते। व्यर्थ जा रही इसी ऊर्जा के माप को एंट्रोपी कहते हैं। समय (Time) की तरह ही एंट्रोपी भी एकदिशीय (unidirectional) है, जो हमेशा आगे की ओर बढ़ती है और कभी पलटती नहीं है।

हठादुत्पन्न लक्षण (Emergent Property)

विज्ञान में "हठादुत्पन्न लक्षण" (Emergent Property) नामक एक घटना होती है, जिसका अर्थ है वह गुण जो किसी प्रणाली के एक अकेले हिस्से में नहीं होता, लेकिन उनके सामूहिक व्यवहार से उत्पन्न होता है।

  • तापमान: किसी एक अकेले परमाणु (atom) या अणु (molecule) का कोई तापमान नहीं होता। जब किसी स्थान पर करोड़ों अणु एक-दूसरे से टकराते हैं और गति करते हैं, तब ऊष्मा उत्पन्न होती है, जिसे हम तापमान कहते हैं।
  • बुद्धिमत्ता: एक अकेला न्यूरॉन (तंत्रिका कोशिका) सोच नहीं सकता, लेकिन मानव मस्तिष्क में मौजूद अरबों न्यूरॉन्स के सामूहिक नेटवर्क से बुद्धिमत्ता (Intelligence) का निर्माण होता है।

इसी तरह, एंट्रोपी भी एक हठादुत्पन्न लक्षण है। यह अणुओं और परमाणुओं के सामूहिक व्यवहार, गतिज ऊर्जा और प्रायिकता सिद्धांत (Probability theory) पर आधारित है।

ऊष्मागतिकी के नियम (Laws of Thermodynamics)

ऊष्मागतिकी के नियमों में एंट्रोपी का विशेष स्थान है:

  • शून्यवाँ नियम (0th Law): यह तापमान (T) से संबंधित है।
  • प्रथम नियम (1st Law): यह आंतरिक ऊर्जा (U) के संरक्षण से संबंधित है।
  • द्वितीय नियम (2nd Law): यह एंट्रोपी (S) नामक ऊष्मागतिक चर (thermodynamic variable) को परिभाषित करता है।

दबाव (P), आयतन (V), और तापमान (T) की तरह ही एंट्रोपी (S) भी एक अवस्था फलन (State Function) है। यह इस बात पर निर्भर नहीं करता कि प्रणाली किस मार्ग से उस अवस्था तक पहुँची है।

एंट्रोपी का समीकरण

यदि कोई प्रणाली अत्यंत सूक्ष्म स्तर पर T तापमान (केल्विन में) पर dQ ऊष्मा ग्रहण करती है या खोती है, तो एंट्रोपी में परिवर्तन (dS) को इस प्रकार दर्शाया जाता है:

dS=dQT

उत्क्रमणीय रुद्धोष्म प्रक्रिया (Reversible Adiabatic process) में, प्रणाली और परिवेश के बीच ऊष्मा का कोई आदान-प्रदान नहीं होता है, अर्थात dQ=0। इसलिए, dS=0। इसका मतलब है कि एक आदर्श रुद्धोष्म प्रक्रिया में एंट्रोपी स्थिर रहती है और इसमें कोई परिवर्तन नहीं होता है।

एंट्रोपी का महत्व

  1. गणितीय संबंध: सूक्ष्म परिवर्तन के लिए यह ऊष्मा और तापमान का अनुपात है (dS=dQ/T)।
  2. इकाई: एंट्रोपी की इकाइयाँ ऊष्मा (जूल) और तापमान (केल्विन) पर निर्भर करती हैं, अतः इसकी इकाई जूल प्रति केल्विन (J/K) होती है।
  3. ऊर्जा की कार्यक्षमता: यदि किसी प्रणाली की एंट्रोपी बढ़ रही है, तो इसका अर्थ है कि ऊष्मा ऊर्जा काम (work) में बदलने के लिए उच्च उपलब्धता स्तर से निम्न उपलब्धता स्तर की ओर जा रही है।
  4. अव्यवस्था (Disorder) का माप: किसी प्रणाली में एंट्रोपी के बढ़ने का सीधा मतलब यह है कि वह प्रणाली एक सुव्यवस्थित (ordered) विन्यास से अव्यवस्थित (disordered) अवस्था की ओर बढ़ रही है।

संदर्भ

  • వేమూరి వేంకటేశ్వరరావు (वेमूरी वेंकटेश्वर राव), "ఎంట్రోపీ (యంతరపి) అంటే ఏమిటి?", Facebook Post
  • Black hole and entropy (Physical Review D)