ऊष्मा धारिता (Heat Capacity)

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ऊष्मा धारिता (Heat Capacity या Thermal Capacity) किसी पदार्थ या भौतिक निकाय का वह गुण है, जो निकाय के तापमान को एक इकाई परिवर्तित करने के लिए आवश्यक ऊष्मा ऊर्जा की मात्रा को दर्शाता है। अंतरराष्ट्रीय मानक प्रणाली (SI Unit) में ऊष्मा धारिता का मात्रक जूल प्रति केल्विन (J/K) होता है तथा इसका विमीय सूत्र [M1L2T−2Θ−1] है।

ऊष्मा धारिता एक मात्रात्मक (Extensive) गुण है, अर्थात् इसका मान पदार्थ के द्रव्यमान या निकाय के आकार पर निर्भर करता है। यदि किसी पदार्थ के द्रव्यमान या मोल से इसे विभाजित कर दिया जाए, तो यह एक गहन (Intensive) गुण बन जाता है:

  • विशिष्ट ऊष्मा धारिता (Specific Heat Capacity, c): इकाई द्रव्यमान का तापमान 1 K बढ़ाने हेतु आवश्यक ऊष्मा (मात्रक: J/(kg·K))।
  • मोलर ऊष्मा धारिता (Molar Heat Capacity, Cm): एक मोल शुद्ध पदार्थ का तापमान 1 K बढ़ाने हेतु आवश्यक ऊष्मा (मात्रक: J/(mol·K))।
  • आयतनिक ऊष्मा धारिता (Volumetric Heat Capacity): इकाई आयतन का तापमान 1 K बढ़ाने हेतु आवश्यक ऊष्मा।

मूल परिभाषा एवं संबंध

किसी वस्तु की ऊष्मा धारिता (C) को वस्तु को दी गई ऊष्मा (ΔQ) और उसके परिणामस्वरूप तापमान में होने वाली वृद्धि (ΔT) के अनुपात के रूप में परिभाषित किया जाता है:

C=limΔT→0ΔQΔT=dQdT

ऊष्मागतिकीय संबंध

ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम के अनुसार:

dU=δQ−PdV

ऊष्मा धारिता को मुख्य रूप से दो विशेष परिस्थितियों में मापा जाता है:

1. स्थिर आयतन पर ऊष्मा धारिता (CV)

यदि ऊष्मा स्थिर आयतन (dV=0) पर दी जाए, तो किया गया कार्य शून्य होता है। अतः स्थिर आयतन पर ऊष्मा धारिता आंतरिक ऊर्जा (U) में तापमान के सापेक्ष परिवर्तन की दर है:

CV=(∂U∂T)V

2. स्थिर दाब पर ऊष्मा धारिता (CP)

यदि ऊष्मा स्थिर दाब (dP=0) पर दी जाए, तो यह प्रणाली की एन्थैल्पी (H=U+PV) में परिवर्तन को दर्शाती है:

CP=(∂H∂T)P

सामान्यतः द्रवों और गैसों के लिए CP>CV होता है, क्योंकि स्थिर दाब पर निकाय को न केवल तापमान बढ़ाने के लिए बल्कि तापीय प्रसार (Thermal Expansion) के विरुद्ध बाह्य कार्य करने के लिए भी अतिरिक्त ऊष्मा की आवश्यकता होती है।

CP और CV में संबंध

सामान्य ऊष्मागतिकीय संबंध

किसी भी समांगी पदार्थ के लिए मूलभूत ऊष्मागतिकीय समीकरण:

CP−CV=T(∂P∂T)V(∂V∂T)P=TVα2βT

जहाँ:

  • α=1V(∂V∂T)P तापीय प्रसार गुणांक (Thermal Expansion Coefficient) है।
  • βT=−1V(∂V∂P)T समतापीय संपीड्यता (Isothermal Compressibility) है।

आदर्श गैस के लिए (मेयर का संबंध)

आदर्श गैस समीकरण PV=nRT का उपयोग करने पर:

CP−CV=nR

प्रति मोल के लिए:

CP,m−CV,m=R

जहाँ R सार्वत्रिक गैस नियतांक (Universal Gas Constant, 8.314 J/(mol⋅K)) है। इस समीकरण को मेयर का सूत्र (Mayer's Relation) कहा जाता है।

ऊष्मा धारिता अनुपात

स्थिर दाब और स्थिर आयतन पर ऊष्मा धारिताओं के अनुपात को रुद्धोष्म सूचकांक (Adiabatic Index) या पॉइसन अनुपात कहा जाता है:

γ=CPCV

विशिष्ट मान एवं ड्यूलॉन्ग-पेटिट नियम

  • ड्यूलॉन्ग-पेटिट नियम (Dulong–Petit Law): सामान्य ताप पर भारी परमाणुओं वाले अधिकांश ठोस तत्वों की मोलर ऊष्मा धारिता लगभग 3R≈24.94 J/(mol⋅K) होती है।
  • जल की विशिष्ट ऊष्मा: द्रव रूप में जल की विशिष्ट ऊष्मा धारिता अत्यंत उच्च होती है:
    • cP≈4.184 J/(g⋅K) (या 1 cal/(g⋅∘C))
    • मोलर आधार पर: CP,m≈75.3 J/(mol⋅K)

संदर्भ