आयरन(III) क्लोराइड
आयरन(III) क्लोराइड (Iron(III) chloride), जिसे फेरिक क्लोराइड और आयरन ट्राइक्लोराइड भी कहा जाता है, आयरन और क्लोरीन से बना एक अकार्बनिक यौगिक है। इसका रासायनिक सूत्र FeCl3 है। इसमें आयरन की ऑक्सीकरण अवस्था +3 होती है। निर्जल आयरन(III) क्लोराइड का मोलर द्रव्यमान 162.20 g/mol है और इसका CAS संख्या 7705-08-0 है।
आयरन(III) क्लोराइड सामान्यतः गहरे हरे-काले से भूरे रंग के ठोस के रूप में दिखाई देता है। प्रकाश के परावर्तन और संचरण के अनुसार इसका रंग अलग दिखाई दे सकता है। यह अत्यधिक आर्द्रताग्राही है और वायु की नमी के संपर्क में आने पर जलयोजित रूपों का निर्माण कर सकता है। इसका हेक्साहाइड्रेट FeCl3·6H2O भी व्यापक रूप से पाया जाता है। जल में घुलने पर इसका विलयन अम्लीय और संक्षारक होता है।
नामकरण
आयरन(III) क्लोराइड का IUPAC नाम आयरन(III) क्लोराइड है। इसे सामान्यतः फेरिक क्लोराइड भी कहा जाता है। पुराने साहित्य में इसके लिए आयरन ट्राइक्लोराइड तथा मोलिसाइट नाम भी मिलते हैं।
यहाँ "(III)" आयरन की +3 ऑक्सीकरण अवस्था को दर्शाता है। दूसरी ओर FeCl2 में आयरन की ऑक्सीकरण अवस्था +2 होती है और उसे आयरन(II) क्लोराइड या फेरस क्लोराइड कहा जाता है।
संरचना
निर्जल FeCl3 एक आणविक तथा समन्वयित संरचना वाला यौगिक है। ठोस अवस्था में आयरन और क्लोरीन के बीच समन्वय के कारण इसकी संरचना सरल पृथक FeCl3 अणुओं से अधिक जटिल होती है। गैसीय अवस्था में लगभग 400 °C के आसपास इसका द्विमेरिक रूप Fe2Cl6 पाया जा सकता है, जबकि अधिक तापमान पर यह मोनोमेरिक FeCl3 में परिवर्तित हो सकता है।
हेक्साहाइड्रेट का संरचनात्मक स्वरूप निर्जल यौगिक से भिन्न होता है। हाइड्रेटेड रूप में जल के अणु तथा क्लोराइड आयन आयरन(III) के समन्वय वातावरण का हिस्सा बनते हैं।
भौतिक गुण
रंग और अवस्था
निर्जल आयरन(III) क्लोराइड गहरे हरे-काले, लाल-भूरे या भूरे-काले रंग का क्रिस्टलीय ठोस दिखाई दे सकता है। प्रकाश के संचरण और परावर्तन के आधार पर इसका दिखाई देने वाला रंग बदल सकता है। हेक्साहाइड्रेट अपेक्षाकृत पीले-भूरे रंग का होता है।
घनत्व
निर्जल आयरन(III) क्लोराइड का घनत्व लगभग 2.90 g/cm3 है। हेक्साहाइड्रेट का घनत्व लगभग 1.82 g/cm3 है।
गलनांक और अपघटन
निर्जल आयरन(III) क्लोराइड का गलनांक लगभग 307.6 °C बताया जाता है। लगभग 316 °C पर यह उबलने के बजाय विघटित हो सकता है। हेक्साहाइड्रेट का संक्रमण या गलन लगभग 37 °C के आसपास होता है।
विलेयता
आयरन(III) क्लोराइड जल में अत्यधिक विलेय है। इसके जलीय विलयन सामान्यतः पीले से भूरे रंग के दिखाई देते हैं। यह अल्कोहॉल, एसीटोन तथा कुछ अन्य ध्रुवीय कार्बनिक विलायकों में भी घुल सकता है।
रासायनिक गुण
आयरन(III) क्लोराइड एक लुईस अम्ल है और कई रासायनिक अभिक्रियाओं में इलेक्ट्रॉन-युग्म ग्राही के रूप में कार्य कर सकता है। इसका जलीय विलयन अम्लीय होता है क्योंकि Fe3+ आयन जल के साथ जलअपघटन (hydrolysis) अभिक्रियाओं में भाग लेता है।
- Fe3+ + H2O ⇌ FeOH2+ + H+
इसी कारण FeCl3 के सांद्र जलीय विलयन संक्षारक होते हैं।
जलअपघटन
जल में आयरन(III) क्लोराइड घुलने पर हाइड्रेटेड आयरन(III) आयन बनते हैं। ये आयन आगे जलअपघटन कर हाइड्रोजन आयन उत्पन्न करते हैं, जिसके कारण विलयन अम्लीय हो जाता है।
ऑक्सीकरण-अवकरण अभिक्रियाएँ
आयरन(III) क्लोराइड एक ऑक्सीकारक के रूप में कार्य कर सकता है। यह स्वयं Fe3+ से Fe2+ में अपचयित हो सकता है।
उदाहरण के लिए, आयरन धातु के साथ अभिक्रिया में:
- 2FeCl3 + Fe → 3FeCl2
इसी प्रकार कॉपर(I) क्लोराइड का कॉपर(II) क्लोराइड में ऑक्सीकरण किया जा सकता है:
- FeCl3 + CuCl → FeCl2 + CuCl2
निर्माण
निर्जल आयरन(III) क्लोराइड को आयरन और क्लोरीन की प्रत्यक्ष अभिक्रिया द्वारा बनाया जा सकता है:
- 2Fe + 3Cl2 → 2FeCl3
औद्योगिक स्तर पर प्रत्यक्ष क्लोरीनीकरण एक महत्वपूर्ण विधि है, जिसमें आयरन या आयरन-युक्त पदार्थों की शुष्क क्लोरीन के साथ अभिक्रिया कराई जाती है।
आयरन(III) क्लोराइड के जलीय विलयन को आयरन(II) क्लोराइड के ऑक्सीकरण द्वारा भी तैयार किया जा सकता है। क्लोरीन द्वारा ऑक्सीकरण की अभिक्रिया:
- 2FeCl2 + Cl2 → 2FeCl3
ऑक्सीजन और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की उपस्थिति में भी FeCl2 का FeCl3 में ऑक्सीकरण किया जा सकता है:
- 4FeCl2 + O2 + 4HCl → 4FeCl3 + 2H2O
हाइड्रोजन पेरॉक्साइड जैसे ऑक्सीकारकों का उपयोग करके भी Fe(II) को Fe(III) में ऑक्सीकरण किया जा सकता है।
प्रमुख अभिक्रियाएँ
कॉपर के साथ अभिक्रिया
आयरन(III) क्लोराइड कॉपर धातु के साथ अभिक्रिया करके आयरन(II) क्लोराइड तथा कॉपर(I) क्लोराइड बना सकता है:
- FeCl3 + Cu → FeCl2 + CuCl
आगे ऑक्सीकरण होने पर कॉपर(II) क्लोराइड भी बन सकता है।
क्षारों के साथ अभिक्रिया
क्षारीय विलयन में Fe3+ आयन आयरन(III) हाइड्रॉक्साइड का अवक्षेप बनाता है:
- FeCl3 + 3NaOH → Fe(OH)3↓ + 3NaCl
Fe(OH)3 का अवक्षेप सामान्यतः लाल-भूरे या भूरे रंग का होता है।
क्लोराइड आयनों के साथ समिश्र निर्माण
अधिक क्लोराइड आयन की उपस्थिति में आयरन(III) क्लोराइड टेट्राक्लोरोफेरेट(III) आयन का निर्माण कर सकता है:
- FeCl3 + Cl− ⇌ [FeCl4]−
यह समिश्र आयन क्लोराइड-समृद्ध विलयनों में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
उपयोग
जल और अपशिष्ट जल उपचार
आयरन(III) क्लोराइड का सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक उपयोग जल उपचार और अपशिष्ट जल उपचार में फ्लोकुलेशन तथा कोएगुलेशन एजेंट के रूप में है। यह जल में उपस्थित निलंबित कणों, फॉस्फेट तथा अन्य अशुद्धियों को बड़े फ्लॉक्स में परिवर्तित करने में सहायता करता है, जिन्हें बाद में अवसादन या निस्यंदन द्वारा हटाया जा सकता है।
जल में Fe3+ से बने हाइड्रॉक्साइड-आधारित फ्लॉक्स विभिन्न अशुद्धियों को अपने साथ आकर्षित और अवशोषित कर सकते हैं। इसी कारण इसका उपयोग पेयजल तथा औद्योगिक जल के उपचार में किया जाता है।
मुद्रित परिपथ बोर्ड
आयरन(III) क्लोराइड का उपयोग मुद्रित परिपथ बोर्ड (PCB) के निर्माण में कॉपर की परत को हटाने के लिए एच्चिंग एजेंट के रूप में किया जाता है।
एक सरल रूप में कॉपर के साथ इसकी अभिक्रिया इस प्रकार लिखी जा सकती है:
- 2FeCl3 + Cu → 2FeCl2 + CuCl2
यह अभिक्रिया कॉपर की पतली परत को नियंत्रित रूप से हटाने में उपयोगी है।
धातुकर्म
आयरन(III) क्लोराइड का उपयोग कुछ धातुकर्मीय प्रक्रियाओं में लीचिंग एजेंट के रूप में किया जाता है। यह विशेष रूप से कुछ धातु-युक्त पदार्थों से धातुओं को घोल में स्थानांतरित करने वाली प्रक्रियाओं में उपयोगी हो सकता है।
रासायनिक संश्लेषण
FeCl3 का उपयोग कार्बनिक रसायन में लुईस अम्ल और अभिक्रिया सहायक के रूप में किया जाता है। यह कुछ क्लोरीनीकरण, ऑक्सीकरण और अन्य कार्बनिक अभिक्रियाओं में उत्प्रेरक या अभिकर्मक के रूप में प्रयुक्त हो सकता है।
विश्लेषणात्मक रसायन
आयरन(III) क्लोराइड का उपयोग कुछ कार्बनिक यौगिकों की पहचान के लिए किया जाता है। उदाहरण के लिए, फिनॉल समूह वाले कुछ यौगिकों के साथ FeCl3 रंगीन समिश्र बना सकता है। इसलिए इसका उपयोग गुणात्मक रासायनिक परीक्षणों में किया जाता है।
प्राकृतिक उपस्थिति
आयरन(III) क्लोराइड प्रकृति में स्वतंत्र यौगिक के रूप में सामान्य नहीं है। इसका प्राकृतिक खनिज रूप मोलिसाइट (molysite) कहलाता है। मोलिसाइट मुख्यतः अत्यधिक शुष्क और क्लोराइड-समृद्ध ज्वालामुखीय वातावरणों से संबंधित है।
सुरक्षा
आयरन(III) क्लोराइड एक संक्षारक रसायन है। इसके ठोस तथा विशेष रूप से सांद्र विलयन त्वचा और आँखों को गंभीर क्षति पहुँचा सकते हैं। इसके जलीय विलयन अम्लीय होते हैं और कई धातुओं के लिए संक्षारक हो सकते हैं। यह अज्वलनशील है, लेकिन इसके साथ कार्य करते समय त्वचा, आँखों और श्वसन तंत्र को अनावश्यक संपर्क से बचाना आवश्यक है।
प्रयोगशाला में इसे संभालते समय उपयुक्त व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण जैसे सुरक्षात्मक दस्ताने और सुरक्षा चश्मे का उपयोग करना चाहिए। सांद्र विलयन के संपर्क में आने पर संबंधित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करना चाहिए।
पर्यावरणीय प्रभाव
आयरन(III) क्लोराइड का उपयोग जल उपचार में व्यापक रूप से किया जाता है, लेकिन इसके सांद्र रूपों को सीधे पर्यावरण में छोड़ना उचित नहीं है। बड़ी मात्रा में अम्लीय और संक्षारक विलयन स्थानीय जल-रसायन तथा जलीय जीवों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। इसलिए औद्योगिक उपयोग के बाद इसके विलयनों और अपशिष्टों का उचित उपचार आवश्यक है।
संबंधित यौगिक
- आयरन(II) क्लोराइड
- आयरन(III) ऑक्साइड
- आयरन(III) हाइड्रॉक्साइड
- आयरन(III) ब्रोमाइड
- आयरन(III) फ्लोराइड
- आयरन(II) सल्फेट
यह भी देखें
संदर्भ
वर्ग:रासायनिक पदार्थ वर्ग:क्लोराइड वर्ग:आयरन यौगिक वर्ग:अकार्बनिक यौगिक वर्ग:संक्षारक पदार्थ वर्ग:SciWiki Chemistry
