आकालिफ़ा (Acalypha)
| Scientific Classification | |||
|---|---|---|---|
| Kingdom: | प्लांटी (Plantae)
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आकालिफ़ा (वैज्ञानिक नाम: Acalypha indica L.) जिसे हिंदी में सामान्यतः कुप्पी या खोकली कहा जाता है, एउफोर्बिएसिए (Euphorbiaceae) कुल का एक प्रमुख औषधीय पौधा है। व्यापारिक और वैज्ञानिक स्तर पर इसे इसके जीनस नाम 'आकालिफ़ा' से ही अधिक जाना जाता है। यह पौधा अपने विशेष औषधीय गुणों, विशेषकर श्वसन संबंधी रोगों और त्वचा विकारों के उपचार के लिए पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
विभिन्न भाषाओं में नाम
भारत की भौगोलिक और भाषाई विविधता के कारण, इस पौधे को विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है:
- हिंदी: कुप्पी, खोकली
- संस्कृत: हरितमंजरी
- कन्नड़: कुप्पीगिडा
- गुजराती: वेंछिकांटो, चररजो-झाड़, रुंछाडो-दादरो
- तमिल: कुप्पेमणि
- तेलुगु: कुप्पेमणि
- बंगला: मुक्तझूरि, मुक्तबर्सी
- मराठी: खोकली
- मलयालम: कुप्पामणि
वानस्पतिक विवरण
यह एक सीधा बढ़ने वाला क्षुप (Herb) है, जिसकी ऊंचाई लगभग 75 सेंटीमीटर तक होती है।
- पत्तियां (Leaves): इसके पत्ते 3 से 8 सेंटीमीटर लंबे होते हैं। इनका आकार अंडाकार अथवा चतुष्कोण-अंडाकार (Rhomboid-ovate) होता है। पत्तों में प्राय: तीन शिराएं (veins) स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं, और इनके किनारे दंतुर (Serrated/toothed) होते हैं। पत्तों के डंठल (Petiole) पत्तों की लंबाई से भी अधिक लंबे होते हैं।
- पुष्प (Flowers): इसके फूल आकार में छोटे होते हैं और पत्तों के कक्ष (Axil) में स्पाइक (Spike) जैसे सीधे गुच्छों में उत्पन्न होते हैं।
- मादा पुष्प (Female Flowers): मादा पुष्प के नीचे एक तिकोना-सा सहपत्र (Bract) उपस्थित होता है।
- नर पुष्प (Male Flowers): नर पुष्प अत्यंत छोटे होते हैं तथा स्पाइक के ऊपरी भाग में लगे होते हैं।
- फल (Fruits): पौधे के फल रोयेंदार (Hairy) होते हैं तथा सहपत्रों (Bracts) से ढके रहते हैं।
प्राप्ति-स्थान और पारिस्थितिकी
खोकली (आकालिफ़ा) का पौधा एक बहुत ही सामान्य खरपतवार (Weed) के रूप में भारत के लगभग सभी मैदानी भागों में बहुतायत से पाया जाता है। यह किसी विशेष देखभाल के बिना ही उद्यानों, कृषि भूमियों (खेतों), सड़कों के किनारे और मानव बस्तियों या मकानों के आसपास आसानी से उग आता है।
औषधीय गुण और उपयोग
औषधीय प्रयोजनों के लिए इस पौधे को उस समय समूचा उखाड़ लिया जाता है जब इस पर फूल आ रहे होते हैं। इसे सुखाकर औषधि के रूप में संरक्षित किया जाता है।
- श्वसन तंत्र के रोग: इस पौधे में 'ईपेकाक' (Ipecac) जैसे गुण पाए जाते हैं। यह श्वास नली की सूजन (Bronchitis), दमा (Asthma), और निमोनिया (Pneumonia) जैसे श्वसन रोगों में अत्यंत लाभकारी माना गया है।
- गठिया (Arthritis): इसके औषधीय गुण गठिया या जोड़ों के दर्द में भी राहत प्रदान करते हैं।
- रेचक गुण (Laxative): इस पौधे की जड़ (Root) और पत्ते (Leaves) रेचक (Laxative) प्रकृति के होते हैं, जो पेट साफ करने में मदद करते हैं।
- वमनकारी (Emetic): इसके पत्तों का रस वमनकारी होता है, अर्थात् इसके सेवन से उल्टी (कै) हो जाती है। इसका उपयोग शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने के लिए किया जाता है।
- त्वचा विकार: इसके ताजे पत्तों को पीसकर बनाए गए लेप को फोड़ों (Boils) और त्वचा के संक्रमण पर लगाने से शीघ्र लाभ मिलता है।
