अनुप्रस्थ तरंगें (Transverse Waves)

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अनुप्रस्थ तरंगें (Transverse Waves) वे तरंगें हैं जिनमें माध्यम के कणों के कंपन या दोलन की दिशा तरंग संचरण की दिशा के लंबवत (90∘) होती है।[1]

यांत्रिक अनुप्रस्थ तरंगों के संचरण में माध्यम के कण अपने स्थान से आगे नहीं बढ़ते, बल्कि अपनी माध्य स्थिति के ऊपर-नीचे लंबवत दोलन करते हैं और ऊर्जा को आगे की ओर स्थानांतरित करते हैं। प्रकाश तरंगें एवं अन्य सभी विद्युत चुम्बकीय तरंगें भी गैर-यांत्रिक अनुप्रस्थ तरंगों के अंतर्गत आती हैं, जो निर्वात में भी संचरित हो सकती हैं।

तरंग संचरण एवं प्रमुख विशेषताएँ

  • दोलन की दिशा: कणों का विस्थापन तरंग गति की दिशा के लंबवत होता है।
  • श्रृंग और गर्त (Crests and Troughs):
    • श्रृंग (Crest): माध्य स्थिति से ऊपर की ओर अधिकतम धनात्मक विस्थापन का बिंदु।
    • गर्त (Trough): माध्य स्थिति से नीचे की ओर अधिकतम ऋणात्मक विस्थापन का बिंदु।
  • तरंगदैर्घ्य (λ): किन्हीं दो क्रमागत श्रृंगों अथवा किन्हीं दो क्रमागत गर्तों के मध्य की सीधी दूरी को तरंगदैर्घ्य कहते हैं।
  • माध्यम की प्रकृति: यांत्रिक अनुप्रस्थ तरंगें केवल ठोसों में तथा द्रवों की ऊपरी सतह पर (पृष्ठ तनाव के कारण) संचरित हो सकती हैं। ये द्रवों या गैसों के आंतरिक भाग में संचरित नहीं हो सकतीं क्योंकि गैसों में अपरूपण प्रत्यास्थता (Shear Modulus) का अभाव होता है।
  • ध्रुवण (Polarization): ध्रुवण का गुण केवल अनुप्रस्थ तरंगों में ही संभव है, जो इन्हें अनुदैर्ध्य तरंगों से अलग करता है।

प्रमुख उदाहरण

  • जल की सतह पर तरंगें: शांत जल में पत्थर फेंकने पर उत्पन्न होने वाली वृत्ताकार तरंगें। यदि जल की सतह पर लकड़ी का टुकड़ा (कॉर्क) रखा जाए, तो वह आगे बढ़ने के बजाय केवल ऊपर-नीचे दोलन करता है।
  • प्रकाश तरंगें: प्रकाश, एक्स-रे, रेडियो तरंगें आदि, जिनमें विद्युत और चुंबकीय क्षेत्र एक-दूसरे के तथा संचरण की दिशा के लंबवत दोलन करते हैं।
  • तनी हुई डोरी में तरंगें: गिटार, सितार या वायलिन के तारों को छेड़ने पर उत्पन्न होने वाली तरंगें।

अनुप्रस्थ तरंगों में अप्रगामी तरंगें (Standing Waves)

जब समान आयाम और आवृत्ति की दो प्रगामी अनुप्रस्थ तरंगें विपरीत दिशाओं से आकर परस्पर अध्यारोपित (Superimpose) होती हैं, तो माध्यम में अप्रगामी तरंगें निर्मित होती हैं:

  • प्रस्पंद (Antinode): वे बिंदु जहाँ माध्यम के कणों का विस्थापन तथा आयाम अधिकतम होता है।
  • निस्पंद (Node): वे बिंदु जहाँ माध्यम के कणों का विस्थापन तथा आयाम सदैव शून्य होता है।

स्थानिक संबंध

  • किन्हीं दो क्रमागत प्रस्पंदों अथवा दो क्रमागत निस्पंदों के बीच की दूरी तरंगदैर्घ्य की आधी (λ2) होती है।
  • एक प्रस्पंद और उसके ठीक निकटवर्ती निस्पंद के बीच की दूरी तरंगदैर्घ्य की एक-चौथाई (λ4) होती है।

संदर्भ

  1. ↑ The Physics Classroom. "Physics Tutorial: The Anatomy of a Wave". physicsclassroom.com.