अनुदैर्ध्य तरंगें (Longitudinal Waves)

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अनुदैर्ध्य तरंगें (Longitudinal Waves) वे यांत्रिक तरंगें हैं जिनमें माध्यम के कणों के कंपन या दोलन की दिशा तरंग संचरण की दिशा के समानांतर (दिशानुगत) होती है। उदाहरण के लिए, वायु में संचरित होने वाली ध्वनि तरंगें अनुदैर्ध्य प्रकृति की होती हैं।

अनुदैर्ध्य तरंगों के संचरण के लिए एक भौतिक माध्यम (ठोस, द्रव या गैस) का होना अनिवार्य है; ये तरंगें निर्वात (Vacuum) में संचरित नहीं हो सकती हैं। तरंग गति के दौरान माध्यम के कण अपने स्थान से आगे नहीं बढ़ते, बल्कि अपनी माध्य स्थिति के दोनों ओर दोलन करते हुए ऊर्जा और संवेग को एक स्थान से दूसरे स्थान तक स्थानांतरित करते हैं।

तरंग संचरण की प्रक्रिया

माध्यम में विक्षोभ उत्पन्न होने पर कणों के आवर्त दोलन के कारण ऊर्जा आगे बढ़ती है:

  • संपीडन (Compression): माध्यम का वह क्षेत्र जहाँ तरंग संचरण के समय कण परस्पर अत्यधिक निकट आ जाते हैं। इस क्षेत्र में माध्यम का घनत्व तथा दाब अधिकतम होता है।
  • विरलन (Rarefaction): माध्यम का वह क्षेत्र जहाँ कण एक-दूसरे से दूर फैल जाते हैं। इस क्षेत्र में माध्यम का घनत्व तथा दाब न्यूनतम होता है।

प्रमुख विशेषताएँ

  • दोलन की दिशा: माध्यम के कणों का कंपन तरंग संचरण की रेखा के समानांतर होता है।
  • माध्यम की अनिवार्यता: इन तरंगों के संचरण हेतु प्रत्यास्थता (Elasticity) तथा जड़त्व (Inertia) युक्त माध्यम की आवश्यकता होती है।
  • तरंगदैर्घ्य (λ): किन्हीं दो क्रमागत संपीडनों अथवा दो क्रमागत विरलनों के केंद्रों के बीच की दूरी को तरंगदैर्घ्य कहते हैं।
  • माध्यम की अवस्थाएँ: अनुदैर्ध्य तरंगें ठोस, द्रव तथा गैस—तीनों भौतिक अवस्थाओं में संचरित हो सकती हैं, क्योंकि तीनों माध्यमों में आयतन प्रत्यास्थता (Bulk Modulus) पाई जाती है।
  • परावर्तन एवं अप्रगामी तरंगें: जब ये तरंगें किसी दृढ़ अवरोध से टकराती हैं, तो 180∘ (π रेडियन) के कलांतर पर परावर्तित होती हैं। आपतित तथा परावर्तित तरंगों के अध्यारोपण से अप्रगामी तरंगें (Standing Waves) निर्मित होती हैं।

प्रमुख उदाहरण

  • ध्वनि तरंगें: घंटी, लाउडस्पीकर अथवा वाद्ययंत्रों से वायु में उत्पन्न तरंगें।
  • स्प्रिंग में तरंगें: किसी कुंडलिनी स्प्रिंग (Helical Spring) को खींचकर छोड़ने या दबाने पर उत्पन्न संपीडन और विरलन तरंगें।
  • भूकंपीय P-तरंगें: भूकंप के दौरान पृथ्वी की परतों में सबसे तीव्र गति से चलने वाली प्राथमिक (Primary) तरंगें।

संदर्भ